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अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग तेज, आंगनबाड़ी संगठन ने सीएम धामी को लिखा पत्र, CBI जांच की उठाई मांग

देहरादून | 29 दिसंबर 2025

मुख्यमंत्री को सौंपा गया पत्र

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है। प्रदेश अध्यक्ष आंगनवाड़ी कार्यकर्ती सेविका मिनी कर्मचारी संगठन उत्तराखंड, श्रीमती रेखा नेगी की ओर से आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर मामले में सीबीआई जांच की मांग की गई है। पत्र में अंकिता भंडारी को जल्द और निष्पक्ष न्याय दिलाने की अपील की गई है।


तीन साल बाद भी वीआईपी का खुलासा नहीं

पत्र में कहा गया है कि आंगनबाड़ी सहायिका की बेटी अंकिता भंडारी के हत्याकांड को तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक मामले में कथित वीआईपी व्यक्ति की पहचान सामने नहीं आ सकी। इसी कारण यह संवेदनशील मामला ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा था।


वीआईपी नाम को लेकर फिर बढ़ी हलचल

श्रीमती रेखा नेगी ने पत्र में उल्लेख किया कि हाल के दिनों में जिस तरह कथित वीआईपी का नाम सामने आने की चर्चाएं पूरे उत्तराखंड में हो रही हैं, उससे एक बार फिर इस प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानना है कि अब मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच बेहद जरूरी हो गई है।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की एकजुट मांग

पत्र के माध्यम से संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस बात पर एकमत हैं कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए, ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके और सच्चाई सामने आए।


सरकार से तत्काल निर्णय की अपील

संगठन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सीबीआई जांच के आदेश जारी किए जाएं। पत्र में कहा गया है कि इससे न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा, बल्कि जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।


आंदोलन की चेतावनी

पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि सीबीआई जांच नहीं कराई गई, तो प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मजबूरन सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगी। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले हालात की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी


निष्कर्ष

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आंगनबाड़ी संगठन का यह पत्र सरकार पर दबाव बढ़ाता नजर आ रहा है। सीबीआई जांच की मांग और आंदोलन की चेतावनी से स्पष्ट है कि यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह मामला एक बार फिर बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री धामी के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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