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अंकिता भंडारी हत्याकांड पर मुख्यमंत्री धामी का सख्त संदेश: न्याय हो चुका है, कुछ लोग कर रहे हैं राजनीति

देहरादून, उत्तराखंड | दिनांक: 10 फरवरी 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस मामले में न्याय की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सख्ती से पूरी की गई है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कुछ लोग केवल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए एक बेटी के नाम का बार-बार इस्तेमाल कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।


तीनों आरोपी जेल में, उम्रकैद की सजा

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल तीनों आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई, जिसने कई महीनों तक गहन और निष्पक्ष जांच की।


न्यायिक प्रक्रिया में सभी अदालतें रहीं शामिल

सीएम धामी ने कहा कि यह मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें जिला न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक की न्यायिक प्रक्रिया शामिल रही। सभी तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया और दोषी पाए गए तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई। आज तीनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं।


सरकार और प्रशासन ने निभाई जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन ने इस पूरे मामले में अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाई। जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी गई और किसी भी स्तर पर दबाव या हस्तक्षेप नहीं किया गया।


राजनीति के लिए बेटी के नाम का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण

सीएम धामी ने कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके पास जनता के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, वे बार-बार इस संवेदनशील मामले को उछालकर राजनीति करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “ऐसा करके वे न केवल समाज को गुमराह कर रहे हैं, बल्कि उस बेटी की आत्मा को भी बार-बार झकझोरने का प्रयास कर रहे हैं।”


निष्कर्ष

अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दोषियों को कड़ी सजा मिल चुकी है। मुख्यमंत्री धामी के बयान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सरकार कानून के दायरे में रहकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध रही है। ऐसे संवेदनशील मामलों में राजनीति से ऊपर उठकर समाज और व्यवस्था को न्याय, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।

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