देहरादून | 07 जनवरी 2026
उत्तराखंड की बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सोशल मीडिया विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में सोशल मीडिया पर किए गए विवादित पोस्ट और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले लोग भी पुलिस जांच के दायरे में आ गए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम की शिकायत पर डालनवाला थाने में दर्ज प्राथमिकी के बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि अंकिता भंडारी के नाम पर सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर विवादित पोस्ट साझा कर उत्तराखंड में दंगे भड़काने और भारतीय जनता पार्टी की छवि खराब करने की साजिश रची गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन पोस्ट और टिप्पणियों के पीछे किस प्रकार की मंशा काम कर रही थी।
विवादित पोस्ट शेयर करने वालों पर पुलिस की नजर
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में उन सोशल मीडिया यूजर्स को चिह्नित किया गया है, जिन्होंने अंकिता से संबंधित उर्मिला और अन्य विवादित पोस्ट साझा कर उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन गतिविधियों के पीछे सुनियोजित प्रयास था या फिर किसी राजनीतिक या सामाजिक माहौल को बिगाड़ने की मंशा।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शांति व्यवस्था भंग करने या किसी दल अथवा व्यक्ति विशेष की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों की गहन और निष्पक्ष जांच की जाए। पुलिस को यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान हर डिजिटल साक्ष्य को विधिसम्मत तरीके से सुरक्षित किया जाए।
डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर जोर, नोटिस की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारी प्राथमिक चरण में सभी संबंधित सोशल मीडिया हैंडल, पोस्ट, टिप्पणियां और उनके टाइमलाइन का विश्लेषण कर रहे हैं। पुलिस का मुख्य फोकस उन डिजिटल सबूतों को सुरक्षित करना है, जो सीधे तौर पर प्राथमिकी में दर्ज आरोपों से जुड़े हुए हैं।
डिजिटल साक्ष्य एकत्र होने के बाद पुलिस संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर सकती है। जरूरत पड़ने पर साइबर विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है, ताकि किसी भी तकनीकी तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए।
निष्कर्ष
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सोशल मीडिया विवाद पर पुलिस की सख्ती यह संकेत देती है कि मामले को केवल भावनात्मक या राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखा जाएगा। जांच एजेंसियां अब यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह से कानून-व्यवस्था बिगाड़ने या समाज में तनाव फैलाने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। आने वाले दिनों में डिजिटल जांच के नतीजों के आधार पर इस मामले में और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


