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अंकिता भंडारी हत्याकांड: CBI जांच की मांग को लेकर पूर्व सैनिकों का गरिमामय मौन मार्च

देहरादून | 7 जनवरी 2026

उत्तराखंड की सैन्य परंपरा, अनुशासन और नैतिक बल का परिचय देते हुए गौरव सेनानी एसोसिएशन उत्तराखंड के तत्वावधान में बुधवार को देहरादून में एक ऐतिहासिक मौन मार्च आयोजित किया गया। इस मार्च में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्धसैनिक बलों, वीर नारियों और सैनिक परिवारों ने भाग लेकर अंकिता भंडारी हत्याकांड की निष्पक्ष CBI जांच की मांग की।


राजनीति से दूर, न्याय के पक्ष में आवाज

आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह मौन मार्च किसी भी राजनीतिक दल के विरोध या समर्थन में नहीं था। न तो इसमें नारेबाजी की गई और न ही किसी प्रकार का आक्रोश प्रदर्शन हुआ। यह मार्च पूर्णतः संविधान के दायरे में रहकर न्याय की मांग को लेकर पूर्व सैनिक समुदाय की सामूहिक अंतरात्मा की अनुशासित और गरिमामय अभिव्यक्ति था।


मौन में छिपा दृढ़ संकल्प

काले वस्त्रों में, श्वेत मौन और सीधी दृष्टि के साथ निकले इस मार्च ने यह संदेश दिया कि मौन कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे प्रभावशाली वक्तव्य हो सकता है। सैनिक समुदाय का कहना था कि जब एक बेटी के न्याय का प्रश्न उठता है, तो उत्तराखंड का सैनिक न डरता है, न झुकता है और न ही किसी दबाव में आता है। यह मार्च किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय के समर्थन में था।


CBI जांच को बताया सत्य तक पहुंचने का माध्यम

पूर्व सैनिकों ने कहा कि CBI जांच की मांग किसी अविश्वास का प्रतीक नहीं, बल्कि पूरे सत्य तक पहुंचने का संकल्प है। यदि सत्य निर्भीक है, तो निष्पक्ष जांच से भय क्यों? मार्च के माध्यम से यह भी संदेश दिया गया कि सरकार से टकराव नहीं, बल्कि संवैधानिक संवेदनशीलता की अपेक्षा की जा रही है।


सैनिक परंपरा का जीवंत उदाहरण

मार्च के दौरान न कोई उग्र प्रतीक दिखा, न आरोपों से भरे भाषण हुए। केवल अनुशासन, मर्यादा और नैतिक बल के साथ सैनिक परंपरा की गरिमा को प्रस्तुत किया गया। यह मौन मार्च उस परंपरा का प्रतीक बना, जिसमें शोर नहीं, बल्कि संकल्प और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व झलकता है।


वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की सहभागिता

देहरादून के परेड ग्राउंड से निकले इस मौन मार्च में ब्रिगेडियर सर्वेश दत्त डंगवाल, कर्नल राजीव रावत, कर्नल कैलाश देवरानी सहित अनेक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और समाज के गणमान्य लोग शामिल हुए। इसके अलावा नीरंजन चौहान, महिपाल पुंडीर, मनवर सिंह रौथाण, गिरीश जोशी, खुशाल गड़िया, विजय भट्ट, मोहन रावत, दिनेश नैथानी, हरीश सकलानी, महावीर सिंह रावत, विनोद नेगी, कुलदेव सिंह नेगी, वीरेंद्र कंडारी सहित सैकड़ों की संख्या में गौरव सेनानी एसोसिएशन के सदस्य, पूर्व अर्धसैनिक, वीर नारियां, सैनिक आश्रित परिवार और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।


आवाज उठाते रहने का संकल्प

गौरव सेनानी एसोसिएशन के अध्यक्ष महावीर सिंह राणा ने कहा कि उत्तराखंड जैसे सैनिक बहुल प्रदेश में बेटी अंकिता भंडारी की अस्मिता के साथ हुए अपराध को लेकर चुप रहना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस हत्याकांड की जड़ तक पहुंचने और दोषियों को कठोर सजा दिलाने के लिए CBI जांच की मांग लगातार उठाई जाती रहेगी।


निष्कर्ष

देहरादून में आयोजित यह मौन मार्च इतिहास में एक मिसाल के रूप में दर्ज हो गया है, जहां राजनीति के शोर के बीच सैनिकों का मौन राष्ट्र और शासन को आईना दिखाता नजर आया। शांत, लेकिन अडिग यह मार्च उत्तराखंड की उस सैनिक परंपरा का प्रतीक बना, जिसमें न्याय के लिए आवाज मर्यादा, अनुशासन और संवैधानिक मूल्यों के साथ उठाई जाती है।

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