देहरादून | 3 जनवरी 2026
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। वायरल वीडियो और विपक्ष के आरोपों के बीच कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पक्ष रखा और विपक्ष को खुली चुनौती दी।
मंत्री सुबोध उनियाल का स्पष्ट संदेश
मंत्री सुबोध उनियाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “यदि किसी के पास कोई ठोस सबूत हैं तो उन्हें सामने लाया जाए, सरकार हर स्तर की जांच के लिए तैयार है।”
उन्होंने कहा कि इस मामले में गठित एसआईटी की जांच को सत्र न्यायालय, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक सही ठहराया जा चुका है। अदालतों ने स्पष्ट रूप से माना था कि सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है।
वीआईपी विवाद ने फिर पकड़ा जोर
तीन साल पुराने इस मामले में उस दिन रिजॉर्ट में मौजूद कथित वीआईपी के नाम को लेकर सवाल पहले भी उठते रहे हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल होने के बाद यह मुद्दा देहरादून से लेकर दिल्ली तक चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ नया विवाद
पूरा विवाद भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक फेसबुक लाइव वीडियो के बाद सामने आया।
वीडियो में महिला ने अंकिता हत्याकांड में ‘वीआईपी गट्टू’ का जिक्र करते हुए उसे भाजपा का बड़ा नेता बताया। साथ ही एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य का नाम लेते हुए एक कथित ऑडियो का भी हवाला दिया, जिसमें पूरे मामले की जानकारी होने का दावा किया गया। इसी वीडियो के बाद मामला दोबारा सुर्खियों में आ गया।
कांग्रेस का हमला, सीबीआई जांच की मांग
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वायरल वीडियो दिखाया और आरोप लगाया कि सरकार सच्चाई दबा रही है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि दस दिनों के भीतर जांच की सिफारिश नहीं हुई तो कांग्रेस प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी।
भाजपा का पलटवार
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों को “शर्मनाक राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही बताए कि वीआईपी कौन है।
भट्ट ने कहा कि चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए वीआईपी का राग अलाप रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपुष्ट और छेड़छाड़ वाले वायरल वीडियो को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है। भाजपा के अनुसार, उस समय डीजीपी ने सार्वजनिक रूप से अपील की थी कि यदि किसी को वीआईपी की जानकारी है तो सामने आए, लेकिन तब भी कोई सामने नहीं आया।
क्या है पूरा अंकिता हत्याकांड
18 सितंबर 2022 को पौड़ी जिले के वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था।
घटना के एक सप्ताह बाद नहर से शव बरामद हुआ। एसआईटी जांच के बाद करीब 500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई, जिसमें 97 गवाह बनाए गए। इनमें से 47 गवाहों की अदालत में गवाही हुई।
आरोप और सजा
मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य छुपाना), 354(ए) (छेड़छाड़) और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत आरोप तय हुए।
सह-आरोपी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता पर भी हत्या और साक्ष्य छुपाने समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा चला। अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
वीआईपी का रहस्य अब भी बरकरार
घटना के दिन अंकिता ने अपने मित्र पुष्पदीप को बताया था कि रिजॉर्ट में एक बड़े वीआईपी के आने की बात कही जा रही है और उस पर अतिरिक्त सेवा देने का दबाव बनाया जा रहा था।
हालांकि, उस कथित वीआईपी की पहचान आज भी सार्वजनिक नहीं हो सकी है, जो इस मामले को लगातार विवादों में बनाए हुए है।
निष्कर्ष
अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन वीआईपी को लेकर उठते सवाल और सियासी बयानबाजी इस मामले को बार-बार चर्चा में ला रही है। एक ओर सरकार और भाजपा अदालतों के फैसलों का हवाला देकर जांच को अंतिम मान रही है, वहीं कांग्रेस इसे अधूरा सच बताकर नए सिरे से जांच की मांग कर रही है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर और गरमाने के आसार दिखा रहा है।


