स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 8 अप्रैल 2026
उत्तराखंड में अप्रैल माह के बीच मौसम ने अचानक करवट लेकर लोगों को हैरान कर दिया है। प्रदेशभर में हुई मूसलाधार बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी ने ठंड को फिर से लौटा दिया है। हालात यह हैं कि कई क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जिससे लोगों को एक बार फिर सर्दी का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद पहली बार अप्रैल में एक ही दिन में इतनी अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मंगलवार देर रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला बुधवार तक जारी रहा। देहरादून समेत कई क्षेत्रों में चार घंटे से अधिक समय तक तेज बारिश हुई, जिससे जनजीवन प्रभावित हो गया।
यदि वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो चंपावत में सर्वाधिक 85 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा चकराता में 65 मिमी, पंचेश्वर में 63 मिमी, खटीमा में 53 मिमी, नैनीताल में 40 मिमी और मसूरी में 35 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। देहरादून में भी 24 घंटे के भीतर करीब 20 मिमी बारिश हुई, जो इस मौसम के लिहाज से असामान्य मानी जा रही है।
बारिश के साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी भी हुई। बदरीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और औली सहित कई पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी के कई दौर देखने को मिले। इससे चारधाम यात्रा की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदेश के तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। देहरादून का अधिकतम तापमान 23 डिग्री तक पहुंचा, जो सामान्य से 8 डिग्री कम है। वहीं मुक्तेश्वर में अधिकतम तापमान 6.2 डिग्री और नई टिहरी में 8 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी नीचे है। मैदानी इलाकों में भी पारे में गिरावट से ठंड का एहसास बढ़ गया है।
इस अचानक बदले मौसम का सबसे अधिक असर किसानों और बागवानों पर पड़ा है। तेज बारिश और हवाओं के कारण रबी की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं आम और लीची की फसल पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में आंशिक बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है। साथ ही इन क्षेत्रों में आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। मैदानी क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड में अप्रैल के महीने में इस तरह की ठंड और भारी वर्षा ने जलवायु के बदलते रुझानों की ओर संकेत किया है। जहां एक ओर लोगों को मौसम की मार झेलनी पड़ रही है, वहीं कृषि और पर्यटन गतिविधियों पर भी इसका असर साफ नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में मौसम के तेवर पर नजर बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।



