देहरादून, 25 फरवरी 2026
भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मध्य हिमालयी राज्य उत्तराखंड में भवन निर्माण नियमों को और सख्त एवं वैज्ञानिक बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी नए भूकंपीय मानचित्र में पूरे राज्य को जोन-6 में वर्गीकृत किए जाने के बाद अब भवन निर्माण उपविधि (बिल्डिंग बायलॉज) में व्यापक संशोधन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में 14 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
पुराना वर्गीकरण बदला, अब पूरा राज्य उच्च संवेदनशील श्रेणी में
अब तक राज्य का उत्तरी हिस्सा भूकंपीय जोन-5 और मैदानी क्षेत्र जोन-4 में आता था। नवंबर में भारतीय मानक ब्यूरो ने नया भूकंपीय मानचित्र जारी करते हुए पूरे उत्तराखंड को जोन-6 में शामिल कर दिया, जो उच्चतम संवेदनशील श्रेणी मानी जा रही है।
इसी के मद्देनजर वर्तमान बायलॉज की समीक्षा कर उन्हें नए मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुरूप संशोधित किया जाएगा।
सीबीआरआई निदेशक की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय समिति गठित
संशोधन का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित समिति की अध्यक्षता केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार करेंगे, जबकि उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार को संयोजक बनाया गया है।
समिति में शामिल प्रमुख सदस्य:
-
डॉ. अजय चौरसिया (सीबीआरआई, रुड़की)
-
प्रो. महुआ मुखर्जी (आईआईटी रुड़की)
-
मधुरिमा माधव (भारतीय मानक ब्यूरो)
-
डॉ. पी.के. दास (यूएनडीपी)
-
एस.के. नेगी (पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई)
-
भूकंप विशेषज्ञ धर्मेंद्र कुशवाहा
-
भू-भौतिक विज्ञानी डॉ. विशाल वत्स
-
ब्रिडकुल, लोनिवि, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास एवं विकास प्राधिकरणों के प्रतिनिधि
सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करने पर जोर
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं, बल्कि सुरक्षित और जिम्मेदार निर्माण की संस्कृति विकसित करना है।
संशोधित बायलॉज में विशेष रूप से शामिल होंगे:
-
भूकंपरोधी डिजाइन अनिवार्यता
-
भू-तकनीकी जांच
-
विंड लोड और संरचनात्मक सुरक्षा प्रावधान
-
जलवायु अनुकूल एवं पर्यावरणीय संतुलन आधारित निर्माण
-
पारंपरिक पहाड़ी निर्माण तकनीकों का वैज्ञानिक समावेश
समिति की प्रमुख जिम्मेदारियां
समिति निम्नलिखित कार्य करेगी:
-
वर्तमान बायलॉज की विस्तृत समीक्षा और तकनीकी विश्लेषण
-
भूकंप, भूस्खलन व अन्य आपदा जोखिमों को शामिल करते हुए संशोधित प्रारूप तैयार करना
-
आधुनिक निर्माण तकनीक और संरचनात्मक सुरक्षा के प्रावधान जोड़ना
-
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल निर्माण के लिए विशेष दिशा-निर्देश
-
प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना तैयार करना
-
अभियंताओं और योजनाकारों के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण सुझाव देना
आवास विभाग करेगा अंतिम संशोधन
समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आवास विभाग को सौंपेगी। इसके आधार पर आवास विभाग भवन निर्माण उपविधि में आवश्यक संशोधन कर क्रियान्वयन प्रक्रिया शुरू करेगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि संशोधित नियमों से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आपदा जोखिम में उल्लेखनीय कमी आएगी।
निष्कर्ष
भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील उत्तराखंड में यह निर्णय भविष्य की बड़ी आपदाओं से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि संशोधित बायलॉज प्रभावी रूप से लागू होते हैं तो राज्य में निर्माण कार्य अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आपदा-रोधी बन सकेगा, जिससे जनहानि और आर्थिक नुकसान में कमी लाई जा सकेगी।


