BREAKING

उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही: ‘जो जागे वो बच गए, जो नहीं जागे वो बह गए’ — मजदूरों की आंखोंदेखी दास्तान

सिलाई बैंड, उत्तरकाशी | 30 जून 2025

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में शनिवार देर रात कुदरत ने एक बार फिर अपना कहर बरपाया। बड़कोट के पास सिलाई बैंड क्षेत्र में बादल फटने से यमुनोत्री हाईवे का करीब 20 मीटर हिस्सा बह गया और टिन-प्लाई के टेंटों में सो रहे नौ मजदूर तेज पानी और मलबे की चपेट में आकर लापता हो गए। इनमें से दो के शव रविवार को यमुना नदी से बरामद किए गए, जबकि सात की तलाश जारी है।


रात डेढ़ बजे आया कहर, सोए थे मजदूर

नेपाल निवासी हरिकृष्ण चौधरी ने बताया कि रात करीब 1 बजे अचानक टेंट में ठंड का एहसास हुआ, तब पता चला कि अंदर पानी भर रहा है।

“मैंने साथियों को जगाया, कुछ उठ गए और भाग निकले… लेकिन जो नहीं जागे, उन्हें मलबा बहा ले गया।”

कीर्ति बहादुर, जो दूसरे टेंट में थे, ने बताया कि दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने प्लाई तोड़कर बाहर निकलकर जान बचाई।

इन टेंटों में कामगार चार से छह की संख्या में अलग-अलग दूरी पर रहते थे। अचानक हुई भारी बारिश के चलते पानी के साथ आया मलबा इन टेंटों को बहा ले गया।


20 लोग किसी तरह भागे, पर कुछ अपने साथी बचा न सके

भागकर जान बचाने वाले 20 मजदूरों के पास अब सिर्फ वही कपड़े हैं, जो उन्होंने पहन रखे थे। ग्रामीणों ने उन्हें पालीगाड में शरण और कपड़े उपलब्ध कराए। कुछ मजदूरों ने बताया कि कुछ साथी पैसा और सामान बचाने की कोशिश में बह गए।


कहां हुआ नुकसान?

  • स्थान: सिलाई बैंड, बड़कोट
  • हादसे का समय: शनिवार रात लगभग 1:00 बजे
  • मुख्य कारण: नाले के पास बादल फटने से आया पानी व मलबा
  • प्रभाव: यमुनोत्री हाईवे का 20 मीटर हिस्सा बहा, टेंटों में रह रहे मजदूर बह गए

ये दो मजदूर मृत मिले

  • दूजेलाल (55) – निवासी पीलीभीत
  • केवल बिष्ट (43) – निवासी नेपाल

अब भी लापता हैं

  1. रोशन चौधरी (37) – नेपाल
  2. अनवीर धामी (40) – नेपाल
  3. कल्लूराम चौधरी (60) – नेपाल
  4. जयचंद (38) – कालिदास रोड, देहरादून
  5. छोटू (22) – कालिदास रोड, देहरादून
  6. प्रियांश (20) – कालिदास रोड, देहरादून
  7. सर कटेल धामी (32) – देहरादून

एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमों ने बचाव और सर्च अभियान तेज कर दिया है। डीएम प्रशांत आर्य ने बताया कि लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।


बदरीनाथ हाईवे भी प्रभावित

शनिवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने बदरीनाथ हाईवे की रफ्तार भी रोक दी।

  • कमेड़ा (गौचर) में हाईवे सुबह 5 बजे बंद हो गया था, जिसे दो घंटे बाद खोला गया।
  • उमट्टा (कर्णप्रयाग) में विशाल बोल्डर गिरने से ढाई घंटे तक यातायात बाधित रहा।
  • रंडोली गदेरे (आदिबदरी के पास) में भी नैनीताल हाईवे दो घंटे तक बंद रहा।

स्थानीय निवासी आशीष डिमरी ने बताया कि एक होटल पर गिरने से बाल-बाल बचा विशाल बोल्डर, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।


निष्कर्ष:

उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर दिखा दिया कि पहाड़ों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी अप्रत्याशित और भयावह हो सकती हैं। उत्तरकाशी की इस घटना ने मजदूरों की असुरक्षित जीवनशैली और मौसम के खतरों को उजागर किया है।

बचे मजदूरों की आंखों देखी दास्तान रुला देने वाली है।
प्रशासन राहत-बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन पहाड़ों में हर रात अब डर लेकर आती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *