देहरादून, 28 फरवरी 2026
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही कांग्रेस संगठन को धार देने की तैयारी में है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के गठन को लेकर तस्वीर अब भी साफ नहीं हो पाई है। पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं में ‘सिपाही’ की बजाय ‘कमांडर’ बनने की चाह ने पीसीसी गठन को और जटिल बना दिया है।
हाईकमान की रणनीति: छोटी और सधी हुई टीम
कांग्रेस हाईकमान 2027 के चुनावी मुकाबले के लिए ऊर्जावान और दमदार नेताओं की एक छोटी लेकिन प्रभावी टीम बनाना चाहता है। सूत्रों के अनुसार, इस बार पीसीसी में सीमित पदाधिकारी रखे जाएंगे और हर पदाधिकारी की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाएगी। उद्देश्य है कि संगठनात्मक ढांचा चुस्त-दुरुस्त रहे और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
2022 के बाद नहीं हुआ नया गठन
प्रदेश कांग्रेस में वर्ष 2022 के बाद से पीसीसी का नया गठन नहीं हो पाया है। पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह के कार्यकाल में बनी कार्यकारिणी में 200 से अधिक पदाधिकारी शामिल थे। बाद में अध्यक्ष तो बदले गए, लेकिन संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
करन माहरा ने अध्यक्ष रहते हुए नई टीम गठित करने का प्रयास किया था, लेकिन हाईकमान ने उस पर अंतिम मुहर नहीं लगाई। इसी पुरानी टीम के सहारे कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के साथ-साथ मंगलौर, बदरीनाथ और केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव लड़े। इनमें से मंगलौर और बदरीनाथ सीट पर पार्टी को जीत मिली।
गणेश गोदियाल के सामने चुनौती
हाईकमान ने 16 नवंबर 2025 को गणेश गोदियाल को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी। पदभार संभालने के बाद से ही उनसे नई और प्रभावी टीम के गठन की उम्मीद की जा रही है। दिल्ली में पीसीसी गठन को लेकर कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं, लेकिन अब तक अंतिम सूची सामने नहीं आई है।
वरिष्ठ नेताओं की अलग-अलग सूचियां बनीं बाधा
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं ने पीसीसी के लिए अपनी-अपनी अनुशंसित सूची हाईकमान को सौंप दी है। हर नेता अपने समर्थकों को संगठन में स्थान दिलाने की कोशिश में है। यही वजह है कि पीसीसी गठन की प्रक्रिया लंबित हो गई है।
संगठन बनाम महत्वाकांक्षा की जंग
कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठन को मजबूत करने की है। जमीनी स्तर पर सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं की जरूरत है, लेकिन पदों की बढ़ती दावेदारी ने संगठनात्मक संतुलन बिगाड़ दिया है। पार्टी के भीतर ‘कमांडर’ बनने की चाह अगर नियंत्रित नहीं हुई तो यह 2027 की रणनीति पर असर डाल सकती है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनाव बेहद अहम हैं। हाईकमान छोटी और जवाबदेह टीम बनाकर संगठन को नई दिशा देना चाहता है, लेकिन आंतरिक खींचतान और पदों की लंबी सूची पीसीसी गठन में देरी का कारण बन रही है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक मजबूती और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है।


