नई दिल्ली | 7 फरवरी 2026
उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी और कोटद्वार के बेटे दीपक को न्याय दिलाने की आवाज राज्यसभा में प्रभावी ढंग से उठाने पर राज्यसभा सांसद एवं मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी का उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। दिल्ली में आयोजित इस सम्मान कार्यक्रम में उत्तराखंड की पीड़ा को राष्ट्रीय मंच पर रखने के लिए उनका आभार व्यक्त किया गया।
राज्य आंदोलनकारियों ने जताया आभार
टिहरी जनपद के उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी एवं पूर्व राज्यमंत्री सैयद मुसर्रफ अली, राज्य आंदोलनकारी कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष राकेश राणा और सामाजिक कार्यकर्ता मिस बाबुल हसनबुलंद ने इमरान प्रतापगढ़ी को शॉल ओढ़ाकर और पहाड़ की पारंपरिक मिठाई भेंट कर सम्मानित किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों को संसद के उच्च सदन में मजबूती से उठाना सराहनीय कदम है।
सत्ता पक्ष के सांसदों पर उठे सवाल
इस अवसर पर राकेश राणा और सैयद मुसर्रफ अली ने कहा कि उत्तराखंड से पांच लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसद केंद्र की सत्तासीन सरकार में होने के बावजूद न तो अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई गई और न ही कोटद्वार के बेटे दीपक के साथ हुई कथित प्रताड़ना का मुद्दा संसद में प्रभावी रूप से रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि धराली से लेकर थराली तक आई आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों और प्रभावितों की पीड़ा को भी नजरअंदाज किया गया।
राज्यसभा में बुलंद हुई उत्तराखंड की पीड़ा
राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि इमरान प्रतापगढ़ी ने राज्यसभा में जिस संवेदनशीलता और मजबूती के साथ अंकिता भंडारी प्रकरण, कोटद्वार के दीपक के कथित उत्पीड़न और देशभर में महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाया, वह काबिले-तारीफ है। उन्होंने सत्ता के दुरुपयोग, जाति-धर्म के नाम पर समाज में नफरत फैलाने और मंदिर-मस्जिद के नाम पर लोगों को बांटने की प्रवृत्ति के खिलाफ भी पुरजोर आवाज उठाई।
युवाओं के लोकप्रिय नेता के रूप में सराहना
राज्य आंदोलनकारियों ने इमरान प्रतापगढ़ी को युवाओं के बीच लोकप्रिय नेता बताते हुए कहा कि उनकी बेबाक और संवेदनशील आवाज देश के उन लोगों की उम्मीद बन रही है, जिन्हें न्याय की तलाश है। उत्तराखंड के मामलों को राष्ट्रीय मंच पर उठाने से पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद जगी है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों द्वारा किया गया यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का अभिनंदन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटी और बेटे के लिए न्याय की सामूहिक आवाज का प्रतीक है। राज्यसभा में उठे इन मुद्दों से यह संदेश गया है कि अगर जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता और साहस के साथ बोलें, तो पीड़ितों की आवाज सत्ता के गलियारों तक मजबूती से पहुंच सकती है।





