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उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ा हिमस्खलन का खतरा, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

देहरादून | 20 मार्च 2026 (शुक्रवार)


उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बदलते मौसम और अस्थिर बर्फीली परतों के कारण हिमस्खलन (एवलांच) का खतरा तेजी से बढ़ गया है। रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE), चंडीगढ़ ने स्थिति को गंभीर मानते हुए कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।


इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट, कहीं सामान्य स्थिति

जारी बुलेटिन के अनुसार, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में ग्रीन स्तर की चेतावनी जारी की गई है, जहां फिलहाल स्थिति सामान्य मानी जा रही है।

यह अलर्ट शुक्रवार शाम 5 बजे से शनिवार शाम 5 बजे तक प्रभावी रहेगा, जिसके दौरान प्रशासन और स्थानीय लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।


2700 मीटर से ऊपर खतरा ज्यादा, मध्यम हिमस्खलन की आशंका

विशेषज्ञों के अनुसार, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के 2700 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमस्खलन का खतरा स्तर-3 (ऑरेंज) पर बना हुआ है। इसे असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है, जहां मध्यम आकार के हिमस्खलन की संभावना बनी हुई है।

ऊंचाई वाले अधिकांश इलाकों में बर्फ की परतें कमजोर और अस्थिर हो चुकी हैं, जिससे मामूली गतिविधि भी बड़े खतरे को जन्म दे सकती है।


लोगों और पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी

प्रशासन और विशेषज्ञों ने संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सख्त सलाह दी है। खासकर बर्फ से ढके ढलानों और जोखिम वाले मार्गों पर जाने से परहेज करने को कहा गया है।

साथ ही, स्थानीय लोगों को केवल सुरक्षित और चिन्हित रास्तों का ही उपयोग करने की हिदायत दी गई है।


संभावित क्षेत्रों के आसपास रहने वालों को सतर्क रहने की अपील

हिमस्खलन संभावित इलाकों के पास रहने वाले नागरिकों को अलर्ट मोड में रहने और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौसम और बर्फ की स्थिति पहाड़ों में तेजी से बदलती है, इसलिए हर गतिविधि में अतिरिक्त सावधानी बेहद जरूरी है।


निष्कर्ष: सावधानी ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जोखिम और बढ़ सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों, पर्यटकों और ट्रेकर्स को सतर्कता ही अपना सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनाना होगा।

सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी निर्देशों का पालन कर ही संभावित हादसों से बचा जा सकता है।

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