BREAKING

उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: सहमति से होगी भूमि खरीद, एक हाथ से जमीन तो दूसरे हाथ से तुरंत मुआवजा

देहरादून | 28 जनवरी 2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में राज्य की विकास परियोजनाओं को गति देने वाला एक अहम निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से लघु, मध्यम और वृहद परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्त करने की नई प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। इस व्यवस्था के लागू होने से भूमि अधिग्रहण की जटिल और लंबी प्रक्रिया से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।


कैबिनेट के इस फैसले के तहत अब सड़क, बांध, बिजली, सिंचाई और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए जमीन सीधे भू-स्वामियों की सहमति से ली जा सकेगी। इससे जहां कार्यदायी एजेंसियों को समय पर भूमि उपलब्ध होगी, वहीं भू-स्वामियों को भी बिना लंबा इंतजार किए मुआवजा मिल सकेगा।


अब तक भूमि अधिग्रहण की सामान्य प्रक्रिया में पहले भूमि की पहचान, फिर अधिग्रहण का विज्ञापन, नोटिफिकेशन जारी होना और उसके बाद मुआवजा वितरण जैसे कई चरण शामिल होते थे। इस पूरी प्रक्रिया में अक्सर एक साल या उससे अधिक समय लग जाता था, जिससे परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती थीं।


नई व्यवस्था के तहत यदि किसी एजेंसी को भूमि की आवश्यकता होगी, तो वह सीधे संबंधित भू-स्वामियों से संपर्क करेगी। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू मुआवजा दरों के आधार पर मूल्य तय करने के लिए आपसी बातचीत होगी। दोनों पक्षों की सहमति बनते ही भूमि की रजिस्ट्री कराई जाएगी और उसका भुगतान सीधे भू-स्वामी को किया जाएगा।


राजस्व विभाग के सचिव एस.एन. पांडे के अनुसार, यह विकल्प भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के साथ-साथ एक अतिरिक्त और व्यवहारिक रास्ता उपलब्ध कराता है। इससे परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्त करने में आने वाली अड़चनों को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।


अधिकारियों का मानना है कि इस नई प्रक्रिया से भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय तीन से चार गुना तक कम हो सकता है। इसके साथ ही मुआवजे को लेकर होने वाली मुकदमेबाजी में भी कमी आएगी और परियोजनाओं की कुल लागत घटेगी, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।


निष्कर्ष:
उत्तराखंड कैबिनेट का यह निर्णय राज्य में विकास कार्यों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। सहमति के आधार पर भूमि खरीद की यह व्यवस्था न केवल भू-स्वामियों के हितों की रक्षा करेगी, बल्कि समयबद्ध ढंग से परियोजनाओं को धरातल पर उतारने में भी अहम भूमिका निभाएगी। इससे “विकास और विश्वास” दोनों को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार का इरादा साफ झलकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *