22,000 से अधिक प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित, 66,000 से अधिक पदों के लिए हुआ चुनाव, अब लोकतंत्र को मिलेगा नया नेतृत्व
देहरादून, 1 अगस्त 2025 — उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया सफलता पूर्वक संपन्न हो चुकी है। प्रदेश के सभी 12 जिलों में दो चरणों में मतदान कराए गए, जिनकी मतगणना पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को चुनाव आचार संहिता हटाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही अब नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।
चुनावी प्रक्रिया का संक्षिप्त ब्यौरा:
- चुनाव के चरण: 24 और 28 जुलाई को दो चरणों में
- मतगणना शुरू: 31 जुलाई (गुरुवार)
- आचार संहिता समाप्त: 1 अगस्त, सभी जिलों में
कितने पदों के लिए हुआ था चुनाव?
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए कुल 66,418 पदों पर अधिसूचना जारी की थी, जिनमें शामिल थे:
| पद का नाम | कुल पद |
|---|---|
| ग्राम प्रधान | 7,499 |
| ग्राम पंचायत सदस्य | 55,587 |
| क्षेत्र पंचायत सदस्य | 2,974 |
| जिला पंचायत सदस्य | 358 |
| कुल पद | 66,418 |
कितने हुए निर्विरोध, कहां हुई वोटिंग?
- निर्विरोध निर्वाचित प्रत्याशी: 22,429
- रिक्त पद (बिना नामांकन): 32,907
- वास्तविक मतदान वाले पद: 11,082
- चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवार: 32,580
दो चरणों में मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई और सभी जिलों से मतगणना पूर्ण होने के बाद चुनाव परिणाम घोषित किए जा चुके हैं।

शांतिपूर्ण चुनाव: एक बड़ी उपलब्धि
प्रदेश में भारी बारिश और मानसून की चुनौतियों के बीच भी चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुए, जो चुनाव आयोग, प्रशासन और जनता के सहयोग की एक बड़ी मिसाल है। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी इस बार की प्रक्रिया की सराहना की जा रही है।
आगे क्या?
- अब पंचायत प्रतिनिधियों को शपथ दिलाई जाएगी।
- पंचायत राज विभाग द्वारा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि नए प्रतिनिधियों को प्रशासनिक प्रक्रिया, योजनाओं और जिम्मेदारियों की जानकारी दी जा सके।
- चुनाव के साथ लगी आचार संहिता समाप्त होने के बाद अब सभी विकास कार्य सामान्य गति से फिर शुरू हो सकेंगे।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड का पंचायत चुनाव 2025 न सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती का प्रतीक बना, बल्कि इसने राज्य को एक नई पंचायत संरचना भी प्रदान की है। निर्विरोध प्रतिनिधियों की बड़ी संख्या और शांतिपूर्ण चुनावी माहौल इस बात का संकेत है कि जनता अब विकास और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।


