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उत्तराखंड में दहशत का पर्याय बना काला हिमालयन भालू अब देहरादून चिड़ियाघर में, सेब-अमरूद बना पसंदीदा आहार

देहरादून | 29 दिसंबर 2025

पोखरी से दून तक का सफर

उत्तराखंड के चमोली जनपद के पोखरी क्षेत्र में लंबे समय से आतंक का कारण बने काले हिमालयन भालू को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया है। भालू को विशेष पिंजरे में कैद कर देहरादून चिड़ियाघर लाया गया, जहां उसे सुरक्षित बाड़े में रखा गया है।


चिड़ियाघर में बदला मिजाज

पहाड़ों में भोजन की तलाश में भटक रहा यह भालू अब देहरादून चिड़ियाघर में सेब, अमरूद, खीरा और गाजर का स्वाद ले रहा है।
देहरादून चिड़ियाघर के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. प्रदीप मिश्रा के अनुसार भालू पूरी तरह शांत है और सामान्य व्यवहार कर रहा है। खास तौर पर अमरूद उसे सबसे ज्यादा पसंद आ रहा है।


स्वास्थ्य जांच में पूरी तरह फिट

करीब साढ़े पांच फीट लंबा और लगभग 110 किलो वजनी यह काला हिमालयन भालू फिलहाल स्वस्थ बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि भालू शांत है, लेकिन अचानक इंसानों को देखकर आत्मरक्षा में हमला करने की प्रवृत्ति बनी रह सकती है।


पर्यटकों के लिए नहीं खोला जाएगा

चिड़ियाघर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस भालू को पर्यटकों के लिए प्रदर्शित नहीं किया जाएगा।
उसकी दिनचर्या, खानपान और व्यवहार पर नियमित निगरानी रखी जा रही है। साथ ही रात में आराम के लिए नाइट शेल्टर में सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।


केंद्र से अनुमति मिली तो दून में ही रहेगा

देहरादून चिड़ियाघर में पहले से ही एक काले हिमालयन भालू को रखने की योजना है।
यदि राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति मिल जाती है, तो पोखरी से लाए गए इस भालू को स्थायी रूप से देहरादून चिड़ियाघर में ही रखा जा सकता है


क्यों बढ़ रहा है मानव-भालू संघर्ष

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले इलाकों में भालुओं को प्राकृतिक भोजन की कमी झेलनी पड़ रही है।
बांज के बीज, रिंगाल की पत्तियां और जंगली फूल जैसे भोजन अब पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ा कारण बन रहा है, जिसके चलते भालू भोजन की तलाश में गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं।


आत्मरक्षा में करते हैं हमला

डॉ. प्रदीप मिश्रा के अनुसार अब तक की घटनाओं से यह साफ हुआ है कि भालू इंसानों को भोजन नहीं, बल्कि खतरा समझकर आत्मरक्षा में हमला करते हैं। यही वजह है कि पहाड़ी इलाकों में मानव-भालू संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।


निष्कर्ष

चमोली के पोखरी क्षेत्र में दहशत का कारण बना काला हिमालयन भालू अब देहरादून चिड़ियाघर में सुरक्षित है। यह घटना न केवल वन विभाग की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि पहाड़ों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर भी सामने रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राकृतिक भोजन और पर्यावरण संतुलन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

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