देहरादून, 01 अप्रैल 2026
उत्तराखंड के लाखों उपभोक्ताओं के लिए आज से पानी की कीमतों में बढ़ोतरी लागू हो गई है। जल संस्थान ने पानी के बिलों में करीब 4 फीसदी की वृद्धि कर दी है, जिसके बाद अब घरों तक पाइपलाइन से पानी लेने वाले उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना होगा। यह नई दरें बुधवार से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गई हैं।
जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार यह बढ़ोतरी पूर्व निर्धारित टैरिफ संरचना के तहत की गई है, जो वर्ष 2013 के बेस रेट पर आधारित है। इस व्यवस्था के तहत हर वर्ष पानी के शुल्क में संशोधन किया जाता है, हालांकि इस बार वृद्धि दर को सीमित रखते हुए केवल 4 फीसदी तक ही रखा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि पहले लोअर स्लैब में लगभग 9 प्रतिशत और उच्च स्लैब में 11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाती थी, लेकिन उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से इस बार वृद्धि दर को घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने जानकारी दी कि पानी के बिलों का निर्धारण मुख्य रूप से दो आधारों पर किया जाता है। पहला, हाउस टैक्स असेसमेंट के अनुसार उपभोक्ताओं को अलग-अलग स्लैब में रखा जाता है। दूसरा, वैल्यूमेट्रिक टैरिफ (पानी की खपत के आधार पर) लागू होता है, जो प्रदेश के लगभग 50 हजार उपभोक्ताओं पर प्रभावी है।
इस निर्णय के बाद जहां एक ओर विभाग को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी, वहीं आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों को इसका सीधा असर महसूस होगा।
निष्कर्ष
पानी की दरों में यह बढ़ोतरी भले ही सीमित रखी गई हो, लेकिन यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में उपयोगिता सेवाओं की लागत में धीरे-धीरे इजाफा जारी रहेगा। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए पानी के विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण की जरूरत और भी अधिक बढ़ गई है, ताकि बढ़ते खर्च के साथ-साथ संसाधनों का संतुलन भी बना रहे।


