देहरादून | शुक्रवार, 14 फरवरी 2026
उत्तराखंड में मत्स्य पालन को कृषि के बाद आय का मजबूत स्रोत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने मत्स्य क्षेत्र के विस्तार, निर्यात बढ़ाने और किसानों की आमदनी में इजाफा करने के उद्देश्य से कई अहम फैसले लिए हैं। डेनमार्क से ट्राउट मछली के 25 लाख अंडे (ओवा) आयात किए जाएंगे, वहीं पहले चरण में 100 टन ट्राउट मछली के निर्यात की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
यह निर्णय उत्तराखंड राज्य मत्स्य पालक विकास अभिकरण की प्रबंध समिति की 22वीं बैठक में लिए गए। सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में आयोजित बैठक में राज्य में मत्स्य उद्योग को आधुनिक और निर्यातोन्मुख बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में निर्माणाधीन राज्य स्तरीय इंटीग्रेटेड एक्वापार्क में निर्यात केंद्रित प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही तिलैपिया और पंगेशियस मछली की हैचरी के प्रभावी संचालन के लिए भारत सरकार की प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थाओं से परामर्श सेवाएं लेने पर सहमति बनी।
राज्य के ट्राउट मत्स्य पालकों को समय पर उच्च गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने के लिए डेनमार्क से 25 लाख ट्राउट अंडों के आयात को मंजूरी दी गई है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में ट्राउट पालन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा राज्य की झीलों में संरक्षण और संवर्द्धन कार्यों को बढ़ावा देने तथा एक्वा टूरिज्म को विकसित करने के लिए केज कल्चर गतिविधियों के विस्तार पर भी विचार किया गया। इसके लिए संबंधित विभागों और संस्थानों से आवश्यक अनुमतियां ली जाएंगी।
बैठक में हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को आर्नामेंटल फिशरीज (सजावटी मछली पालन) हब के रूप में विकसित करने का निर्णय भी लिया गया। इससे सजावटी मछली उद्योग में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य को इस क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले चार वर्षों में मत्स्य विभाग के बजट में औसतन 22 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। नई ट्राउट प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के चलते मात्स्यिकी क्षेत्र तेजी से उभर रहा है और यह राज्य का तीसरा सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला सेक्टर बन चुका है।
मत्स्य पालकों द्वारा उत्पादित मछलियों के विपणन और निर्यात को मजबूती देने के लिए निर्यात रोडमैप को भी मंजूरी दी गई। पहले चरण में 100 टन ट्राउट मछली के निर्यात के लिए आवश्यक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य में केन्द्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान और मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय, पंतनगर से तकनीकी सहयोग लिया जाएगा।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड में मत्स्य पालन अब पारंपरिक गतिविधि न रहकर आधुनिक और निर्यातोन्मुख उद्योग के रूप में उभर रहा है। ट्राउट अंडों के आयात से लेकर मछली निर्यात तक के फैसले राज्य के मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और एक्वा टूरिज्म को बढ़ावा देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। यह पहल उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।


