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उत्तराखंड में विकास को रफ्तार: नीलकंठ और रामनगर में मल्टीस्टोरी पार्किंग को मंजूरी, पेयजल परियोजनाओं को भी हरी झंडी

स्थान: देहरादून | दिनांक: 19 मार्च 2026


उत्तराखंड में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शहरी विकास, पेयजल और लोक निर्माण विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई।


नीलकंठ और रामनगर में बनेगी आधुनिक मल्टीस्टोरी पार्किंग

बैठक में शहरी विकास विभाग के तहत पौड़ी गढ़वाल स्थित नीलकंठ महादेव और नैनीताल के रामनगर में मल्टीस्टोरी पार्किंग निर्माण को मंजूरी दी गई। नीलकंठ महादेव में प्रस्तावित पार्किंग परियोजना की कुल लागत 5183.65 लाख रुपये तय की गई है, जबकि रामनगर में यह लागत 3857.64 लाख रुपये होगी।


तकनीकी मानकों और सुरक्षा पर विशेष जोर

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पार्किंग निर्माण के दौरान सभी निर्धारित गाइडलाइंस का सख्ती से पालन किया जाए। विशेष रूप से पार्किंग स्थलों पर वाहनों के प्रवेश और निकासी के लिए टर्निंग रेडियस सहित अन्य तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखा जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति न बने।


नीलकंठ में जियोटेक्निकल सर्वे अनिवार्य

नीलकंठ महादेव क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य सचिव ने पार्किंग निर्माण से पहले भूमि का जियोटेक्निकल सर्वे अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पार्किंग भवन के सौंदर्यीकरण के लिए फसाड लाइटिंग पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है, जिससे क्षेत्र की धार्मिक और पर्यटन महत्वता बनी रहे।


पेयजल और सीवर परियोजनाओं को भी मिली स्वीकृति

बैठक में पेयजल विभाग की तीन महत्वपूर्ण योजनाओं—पीपलकोटी नगर पंचायत, तिलवाड़ा नगर पंचायत और ऊखीमठ नगर पंचायत की पेयजल परियोजनाओं को भी संस्तुति दी गई। इसके अलावा, लालकुआं नगर पंचायत में सीवरलाइन परियोजना को भी मंजूरी प्रदान की गई है।


निष्कर्ष

इन परियोजनाओं की मंजूरी से उत्तराखंड में शहरी सुविधाओं और मूलभूत सेवाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है। जहां एक ओर पार्किंग परियोजनाएं पर्यटन स्थलों पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करेंगी, वहीं पेयजल और सीवर योजनाएं स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। राज्य सरकार का यह कदम संतुलित विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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