देहरादून | 4 जनवरी 2026
उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हाईवे, एक्सप्रेस-वे और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों से निराश्रित गोवंश और कुत्तों को हटाने के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी गई है। यह एसओपी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रम में लागू की गई है।
दुर्घटनाओं पर रोक के लिए चरणबद्ध कार्रवाई
मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन द्वारा जारी एसओपी के तहत प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर घूम रहे निराश्रित पशुओं को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इसके साथ ही शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के सार्वजनिक स्थलों से भी इन्हें हटाकर सुरक्षित शेल्टर में भेजा जाएगा।
कई विभागों को पहली बार एक मंच पर जोड़ा गया
इस अभियान के लिए पहली बार एक साथ पंचायती राज, खेल, परिवहन, चिकित्सा स्वास्थ्य, पशुपालन, मत्स्य एवं डेयरी, उच्च शिक्षा, लोक निर्माण, विद्यालयी शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को भी एसओपी के दायरे में लाया गया है।
एसओपी के तहत अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है।
राज्य व जिला स्तर पर निगरानी समितियां गठित
एसओपी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियां बनाई जाएंगी।
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राज्य स्तरीय समिति की अध्यक्षता प्रमुख सचिव या सचिव (शहरी विकास) करेंगे।
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जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे, जो जिले में सभी गतिविधियों की निगरानी और समीक्षा करेगी।
पशु पकड़ दल और गश्ती व्यवस्था होगी मजबूत
प्रत्येक जिला मुख्यालय पर समर्पित गश्ती दल और पशु पकड़ दल गठित किए जाएंगे। प्रत्येक दल में—
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एक वाहन चालक
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दो प्रशिक्षित पशु नियंत्रक
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एक पशु चिकित्सा सहायक
शामिल होंगे।
देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी और नैनीताल जिलों में निराश्रित पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण दो बड़े और दो छोटे पशु पिकअप वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि अन्य जिलों में एक-एक वाहन तैनात होगा।
चार जिलों में खुलेंगे नए डॉग शेल्टर
देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में शुरुआती चरण में 100 कुत्तों की क्षमता वाले दो-दो डॉग शेल्टर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही नए गोसदनों का भी निर्माण किया जाएगा।
पोर्टल और ऐप से होगी लाइव निगरानी
एक समर्पित पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किया जाएगा, जिससे प्रदेश के सभी संबंधित विभाग जुड़े रहेंगे। इस पोर्टल पर गोसदनों और डॉग शेल्टरों की क्षमता, वहां मौजूद पशुओं की संख्या और उपलब्ध स्थान की लाइव जानकारी मिलेगी।
हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर विशेष निगरानी
राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर निराश्रित पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए उच्च जोखिम वाले मार्गों की विशेष निगरानी की जाएगी।
इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 1905 जारी किया गया है। सूचना मिलने पर नियंत्रण कक्ष तत्काल नजदीकी पशु पकड़ दल को मौके पर भेजेगा। प्रत्येक हाईवे खंड के लिए कनिष्ठ अभियंता स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा।
इन स्थानों पर नहीं दिखेंगे निराश्रित पशु
एसओपी के तहत शैक्षिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, खेल परिसरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों से निराश्रित गोवंश व कुत्तों को हटाया जाएगा। नियमित चिन्हांकन कर मानवीय तरीके से उन्हें अधिकृत शेल्टर और गोसदनों में भेजा जाएगा। इन सभी स्थानों के लिए क्षेत्रवार नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार की यह एसओपी सड़क सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और पशु कल्याण—तीनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। हाईवे और सार्वजनिक स्थलों से निराश्रित पशुओं को हटाने की यह व्यवस्था न केवल दुर्घटनाओं को कम करेगी, बल्कि पशुओं के लिए सुरक्षित और मानवीय आश्रय भी सुनिश्चित करेगी। आने वाले समय में इसके प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।


