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उत्तराखंड में हर परिवार को मिलेगी ‘देवभूमि परिवार आईडी’, 18 वर्ष से अधिक उम्र की सबसे बुजुर्ग महिला बनेगी घर की मुखिया

सरकार ने सदन में पेश किया ‘देवभूमि परिवार विधेयक-2026’, सभी योजनाओं के लाभार्थियों का बनेगा एकीकृत डेटाबेस

देहरादून | 10 मार्च 2026

उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में “देवभूमि परिवार विधेयक-2026” सदन पटल पर रखा। इस विधेयक के लागू होने के बाद राज्य में प्रत्येक परिवार की अलग ‘देवभूमि परिवार आईडी’ बनाई जाएगी, जिसमें परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की सबसे वरिष्ठ महिला सदस्य को परिवार का मुखिया दर्ज किया जाएगा।


वर्तमान समय में राज्य के विभिन्न विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इस कारण कई बार लाभार्थियों के आंकड़ों में दोहराव, बार-बार सत्यापन की जटिल प्रक्रिया और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इन चुनौतियों के चलते प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधाएं उत्पन्न होती हैं।


सरकार का कहना है कि देवभूमि परिवार विधेयक-2026 के माध्यम से राज्य में एक एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस तैयार किया जाएगा। यह डेटाबेस विभिन्न विभागों और सरकारी एजेंसियों के लिए लाभार्थियों से संबंधित जानकारी का एक विश्वसनीय और साझा स्रोत बनेगा। इससे योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभ सीधे पात्र परिवारों तक पहुंच सकेगा।


इस नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक परिवार को एक यूनिक देवभूमि परिवार आईडी प्रदान की जाएगी। इस आईडी में परिवार के सभी सदस्यों का विवरण दर्ज होगा और परिवार की सबसे वरिष्ठ 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला सदस्य को परिवार का मुखिया माना जाएगा। सरकार का मानना है कि यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल को सुशासन की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि यह विधेयक राज्य में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाएगा। उन्होंने कहा कि—

देवभूमि परिवार विधेयक-2026 सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्तराखंड के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।


निष्कर्ष:
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून के रूप में लागू हो जाता है तो उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं का लाभ वितरण अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो जाएगा। साथ ही, एकीकृत डेटाबेस बनने से सरकारी योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन भी पहले से अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।

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