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उत्तराखंड में SIR की तैयारियां तेज, हर बूथ पर IT वालंटियर्स देंगे बीएलओ का साथ

स्थान: देहरादून | दिनांक: 21 मार्च 2026

उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अप्रैल माह में प्रस्तावित इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सुचारु और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य के प्रत्येक मतदान केंद्र (बूथ) पर अब तकनीकी रूप से दक्ष आईटी वालंटियर्स तैनात किए जाएंगे, जो बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की सहायता करेंगे।


शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने राज्य नोडल अधिकारियों के साथ तैयारियों का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पुनरीक्षण कार्य को तकनीक से जोड़ते हुए अधिक सटीक और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया जाएगा।


मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देशानुसार, प्रत्येक बूथ पर बीएलओ के साथ आईटी वालंटियर्स की नियुक्ति की जाएगी। ये वालंटियर्स मतदाता गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही, वे प्रपत्रों के वितरण और संग्रहण (कलेक्शन) की प्रक्रिया को भी सुगम बनाएंगे, जिससे कार्य में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित होंगी।


डॉ. पुरुषोत्तम ने अपर सचिव ग्राम्य विकास और निदेशक शहरी विकास विभाग को निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं का चयन कर उन्हें इस अभियान में तैनात करें। उनका कहना था कि प्रशिक्षित वालंटियर्स की मदद से पुनरीक्षण प्रक्रिया में त्रुटियों को कम किया जा सकेगा और डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी।


इसके अलावा, गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के आयुक्तों को बूथ मैपिंग कार्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बूथ का सटीक भौगोलिक और प्रशासनिक विवरण उपलब्ध हो, जिससे मतदाता सूची का कवरेज व्यापक और त्रुटिरहित हो सके।


बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र, अपर सचिव झरना कमठान, निदेशक महिला एवं बाल विकास बीएल राणा, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, निदेशक एसआईसी मनीष जुगरान, अपर निदेशक आईटीडीए तीरथ पाल और उप निदेशक सूचना रवि बिजारनिया सहित गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अपर आयुक्त शामिल थे।


निष्कर्ष

उत्तराखंड में SIR को लेकर की जा रही ये तैयारियां चुनावी प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम हैं। आईटी वालंटियर्स की तैनाती से न केवल काम की गति बढ़ेगी, बल्कि डेटा की शुद्धता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित होगी। आने वाले समय में यह पहल राज्य की चुनावी व्यवस्था को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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