देहरादून, 25 फरवरी 2026
शिक्षा निदेशालय में निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। शासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। इसके तहत ड्यूटी पर तैनात किसी भी कार्मिक से दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ तत्काल भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
ड्यूटी पर धक्का-मुक्की या गाली-गलौच भी अपराध
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की ओर से जारी एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी भी सरकारी कर्मचारी के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट या अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है तो यह दंडनीय अपराध माना जाएगा।
ऐसे मामलों में:
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संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज होगी
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उसे परिसर से तुरंत बाहर किया जाएगा
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भविष्य में प्रवेश पर रोक लगाते हुए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा
गृह विभाग आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील कार्यालयों का वार्षिक सुरक्षा ऑडिट भी कराएगा।
किन कार्यालयों पर लागू होगी एसओपी
यह एसओपी सचिवालय और विधानसभा जैसे उन कार्यालयों पर लागू नहीं होगी, जहां पहले से सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है।
नई एसओपी के दायरे में शामिल होंगे:
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आम नागरिक
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निजी ठेकेदार
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जनप्रतिनिधि
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उनके समर्थक
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अन्य सभी आगंतुक
वाहनों के प्रवेश पर सख्ती
एसओपी के अनुसार:
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कार्यालय परिसरों में आमजन के वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
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वीआईपी और दिव्यांगजनों के वाहनों को भी अंडर-व्हीकल मिरर से जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा।
डिजिटल आगंतुक प्रबंधन और सीसीटीवी अनिवार्य
सभी सरकारी कार्यालयों में अब डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) लागू किया जाएगा।
इसके तहत:
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आगंतुकों का डिजिटल पंजीकरण होगा
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जनप्रतिनिधि अधिकतम तीन लोगों के साथ ही अधिकारी के कक्ष में प्रवेश कर सकेंगे
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उच्च गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे
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फोरेंसिक पहचान के लिए फुटेज सुरक्षित रखी जाएगी
घटना स्थल होगा सील, दो माह में पूरी होगी जांच
यदि किसी कार्यालय में कार्मिक के साथ दुर्व्यवहार की घटना होती है तो:
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घटनास्थल को तुरंत सीज किया जाएगा
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फटे दस्तावेज, क्षतिग्रस्त फर्नीचर जैसे साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं होगी
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संबंधित फुटेज विवेचक को उपलब्ध कराई जाएगी
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घायल कर्मचारी का मेडिकल कराकर मेडिको-लीगल केस दर्ज किया जाएगा
इन मामलों की जांच इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी और दो माह के भीतर विवेचना पूरी करना अनिवार्य होगा।
निष्कर्ष
शिक्षा निदेशालय की घटना के बाद सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि अब सरकारी कार्यालयों में कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। नई एसओपी न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में अनुशासन और जवाबदेही भी मजबूत करेगी।
सरकार का संदेश साफ है—कार्मिकों के सम्मान और सुरक्षा से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


