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उत्तराखंड 2027: “मौका दीजिए, गैरसैंण को राजधानी बनाएंगे” — हरीश रावत की सोशल मीडिया पोस्ट से फिर गरमाई सियासत


स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 14 जुलाई 2025


उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर “गैरसैंण राजधानी” का मुद्दा गरमा गया है।
इस बार आवाज़ उठाई है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखते हुए लोगों से अपील की है कि अगर 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मौका दिया जाता है, तो गैरसैंण को स्थायी राजधानी बना दिया जाएगा।


हरीश रावत का बयान – “2027 में कांग्रेस को मौका दें”

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में लिखा:

“जो लोग कहते हैं कि मुझे मौका मिला और मैंने गैरसैंण को राजधानी नहीं बनाया, उनसे कहूंगा — 2027 में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत दीजिए, हम गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाएंगे।”

उन्होंने लिखा कि गैरसैंण को राजधानी बनाने की दिशा में उनके शासनकाल में गंभीर प्रयास किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि:

  • कांग्रेस सरकार ने 2500 लोगों के ठहरने की क्षमता वहां विकसित की।
  • भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन की आधारशिला भी उनकी सरकार ने रखी।
  • 57 करोड़ रुपये का बजट पास कराया गया था।
  • 5000 आवासीय क्षमता वाले भवनों का निर्माण भी शुरू कराया गया था।

गैरसैंण: उत्तराखंड की राजधानी विवाद का केंद्र

उत्तराखंड की राजधानी को लेकर वर्षों से चर्चा चलती रही है।
वर्तमान में देहरादून राज्य की अस्थायी राजधानी है, जबकि पर्वतीय क्षेत्र गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।

हरीश रावत ने अपने पोस्ट में संकेत दिया कि यदि 2027 में कांग्रेस सत्ता में लौटती है, तो यह मुद्दा पहली प्राथमिकता होगा।


गन्ना किसानों के मुद्दे पर सरकार पर हमला

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में गन्ना किसानों का भी ज़िक्र करते हुए प्रदेश सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि:

  • अब तक पिछले सत्र का गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया गया।
  • बरसात के बाद नए गन्ने की कटाई शुरू होने वाली है, लेकिन पुराने भुगतान का कोई अता-पता नहीं
  • 450 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य तय करने की मांग की जा रही है, लेकिन सरकार अब तक चुप है।
  • यह पहली बार है जब मूल्य तय करने में इतनी देरी हुई है।

“चीनी मिलों को पुराने रेट पर भुगतान करने को कहा जा रहा है। यह किसानों के साथ अन्याय है।”
— हरीश रावत


राजनीतिक विश्लेषण:

हरीश रावत की यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब उत्तराखंड में राजनीतिक तापमान पहले से ही बढ़ा हुआ है।

  • एक ओर भाजपा सरकार विकास और कानून-व्यवस्था को लेकर घिरी हुई है,
  • दूसरी ओर कांग्रेस 2027 के लिए नींव तैयार करने में जुटी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रावत की यह रणनीति “पर्वतीय अस्मिता” और किसान नाराजगी जैसे दो बड़े मुद्दों को जोड़कर कांग्रेस के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास है।


क्या है गैरसैंण की हकीकत?

  • गैरसैंण, चमोली जिले में स्थित है।
  • भूगोलिक दृष्टि से यह गढ़वाल और कुमाऊं के बीच स्थित है, जिससे इसे राजधानी के लिए उपयुक्त माना जाता है
  • लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी, मौसम और पहुंच की जटिलता जैसे मुद्दों के कारण अब तक इसे स्थायी राजधानी नहीं बनाया गया।

निष्कर्ष:
हरीश रावत की सोशल मीडिया पोस्ट से यह साफ है कि कांग्रेस आने वाले चुनावों में गैरसैंण राजधानी और किसानों की समस्याएं जैसे मुद्दों को प्राथमिकता में रखने वाली है।
अब देखना यह है कि यह रणनीति जनता को कितना प्रभावित करती है और सत्ता की गणित में कितनी मददगार बनती है।

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