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उत्तर प्रदेश में बिजली सेक्टर के निजीकरण की आहट, उत्तराखंड में भड़का विरोध: 9 जुलाई को हड़ताल का एलान

देहरादून | 2 जुलाई 2025

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर जहां एक तरफ तेजी देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड में इस प्रस्तावित कदम के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। निजीकरण के विरोध में बुधवार को उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया और 9 जुलाई को राज्यव्यापी हड़ताल का एलान कर दिया।


विरोध का मुख्य बिंदु:

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिजली वितरण का निजीकरण आम जनता के खिलाफ है और इससे सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए घाटे के भ्रामक आंकड़े पेश कर रही है, जबकि सरकारी विभागों पर ही 14,400 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया बिजली बिल है।


“निजीकरण के बाद 12 रुपये यूनिट तक हो सकती है बिजली”

प्रदर्शन में शामिल इंजीनियरों और कर्मियों ने दावा किया कि निजी कंपनियों के आने के बाद सब्सिडी खत्म हो जाएगी और उपभोक्ताओं को 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ेगी। इससे गरीब तबके को लालटेन युग में लौटना पड़ सकता है।


देशव्यापी आंदोलन से जुड़ा उत्तराखंड

यह विरोध प्रदर्शन नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे और महासचिव पी. रत्नाकर राव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का सीधा आरोप लगाया।


प्रदर्शन में ये रहे शामिल:

  • विवेक राजपूत – वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन
  • जसवंत सिंह, एनएस बिष्ट, सौरभ पांडे, मोहित डबराल, प्रदीप पंत, बृजेश यादव, सुभाष कुमार, धनंजय कुमार सहित कई अभियंता शामिल रहे।

आगामी योजना:

  • 9 जुलाई 2025 को राज्यभर में हड़ताल, जिससे सरकारी बिजली आपूर्ति कार्य बाधित रह सकते हैं।
  • एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

उत्तराखंड के बिजली कर्मियों का स्पष्ट कहना है कि वे न तो निजीकरण को स्वीकार करेंगे और न ही किसी राजनीतिक दबाव में झुकेंगे।

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