ऋषिकेश | उत्तराखंड | दिनांक: 15 फरवरी 2026
धार्मिक नगरी ऋषिकेश और आसपास के निकाय क्षेत्रों में निराश्रित गोवंश जनजीवन के लिए गंभीर संकट बनते जा रहे हैं। सड़कों तक सीमित रहने वाले सांड और गायें अब घरों, बेडरूम और सार्वजनिक कार्यक्रमों में घुसकर आतंक मचा रही हैं। बीते एक वर्ष में अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की जान जा चुकी है, जिससे लोगों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ता जा रहा है।
नगर निगम ऋषिकेश क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 800 निराश्रित गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। आए दिन गोवंश के हमले, ट्रैफिक जाम और अफरा-तफरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके बावजूद गोशाला निर्माण की योजनाएं अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पिछले एक साल में प्रगति विहार, शिवाजी नगर और रायवाला क्षेत्र में सांडों के हमले में कई बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनकी उपचार के दौरान मौत हो गई। वहीं, हरिद्वार-ऋषिकेश के प्रमुख धार्मिक स्थल त्रिवेणी घाट पर एक साधु की भी सांड के हमले में जान चली गई थी। इन घटनाओं ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीते माह प्रगति विहार में पूर्व पार्षद एवं महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राकेश सिंह पर भी सांड ने हमला कर दिया था। गनीमत रही कि वह गंभीर रूप से घायल होने से बच गए, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया कि समस्या अब किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रही।
कागजों में सिमटी गोशाला की योजनाएं
शहर में निराश्रित गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम को लंबी कवायद के बाद रायवाला क्षेत्र में 13 बीघा भूमि गोशाला निर्माण हेतु उपलब्ध कराई गई। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। नगर निगम ने करीब 4.79 करोड़ रुपये की लागत से गोशाला निर्माण की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी है, जो स्वीकृति के इंतजार में अटकी हुई है।
नगर पालिका मुनिकीरेती और नगर पंचायत तपोवन द्वारा संयुक्त रूप से भी गोशाला के लिए भूमि चिह्नित की गई थी, लेकिन यह मामला आगे नहीं बढ़ सका। फिलहाल नगर निगम की ओर से हिंसक और आवारा गोवंश को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन यह समाधान अस्थायी साबित हो रहा है।
नगर निगम के महापौर शंभू पासवान ने कहा कि रायवाला में गोशाला निर्माण के लिए डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है। निगम लगातार अभियान चला रहा है और इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकारी शिविर में घुसे सांड, मची भगदड़
शुक्रवार को मुनिकीरेती स्थित रामलीला मैदान में आयोजित सरकारी बहुउद्देशीय शिविर के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक कुछ सांड टेंट के भीतर घुस आए। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के दौरान हुई इस घटना से अधिकारी, कर्मचारी और आम लोग दहशत में आ गए।
सांडों को अपनी ओर बढ़ता देख स्टॉलों पर बैठे कर्मचारी कुर्सियां छोड़कर इधर-उधर भागने लगे। मौके पर मौजूद मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल समेत अन्य अधिकारियों को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। जन सुनवाई पूरी तरह बाधित हो गई।
स्थिति को संभालने के लिए नगर पालिका मुनिकीरेती की अधिशासी अधिकारी अंकिता जोशी ने तुरंत नगर पालिका कर्मियों को बुलाया। कड़ी मशक्कत के बाद सांडों को शिविर से बाहर खदेड़ा गया, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ा रोष जताया। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में हालात और भयावह हो सकते हैं।
निष्कर्ष:
ऋषिकेश में निराश्रित गोवंश की समस्या अब केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि जन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। लगातार हो रही मौतें, हमले और सार्वजनिक आयोजनों में बाधाएं इस बात का संकेत हैं कि अस्थायी उपाय काफी नहीं हैं। जब तक गोशाला निर्माण और स्थायी प्रबंधन की योजनाएं धरातल पर नहीं उतरतीं, तब तक ऋषिकेश के नागरिक इसी तरह भय और अव्यवस्था के साये में जीने को मजबूर रहेंगे।



