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ऋषिकेश वन भूमि विवाद में उतरे हरीश रावत, बापूग्राम के धरने में बोले— “दशकों से बसे परिवारों को उजाड़ना पाप”, सरकार तक पहुंचाएंगे पीड़ा

ऋषिकेश | 7 फरवरी 2026

ऋषिकेश के बापूग्राम क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे वन भूमि विवाद को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है। प्रभावित परिवारों के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने दो टूक कहा कि जो परिवार दशकों से यहां रह रहे हैं, उन्हें उजाड़ना पाप के समान है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।


सीएम और मुख्य सचिव तक पहुंचाएंगे बात

धरने को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने कहा कि वह बापूग्राम के प्रभावित परिवारों की पीड़ा और मांगों से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव आनंदवर्धन को अवगत कराएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह मुद्दा केवल जमीन का नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के भविष्य और मानवीय अधिकारों से जुड़ा है।


आंदोलन की ताकत पर दिया जोर

बापूग्राम वन भूमि प्रकरण में चल रही आमसभा और धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि एकजुटता ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है। वक्ताओं ने दो फरवरी को आयोजित ऐतिहासिक महारैली का जिक्र करते हुए कहा कि हजारों लोगों की मौजूदगी ने सरकार और शासन को आंदोलन की गंभीरता का अहसास कराया है।


संघर्ष समिति का निरंतर विरोध का आह्वान

शुक्रवार को बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित आमसभा में समिति संयोजक रमेश जुगलान ने कहा कि बापूग्राम के निवासी राज्य गठन के समय से ही क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से एकजुट होकर संघर्ष को और तेज करने की अपील की।


सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति

संघर्ष समिति के वरिष्ठ सदस्य राजपाल खरोला ने कहा कि प्रभावित परिवारों के पक्ष में सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं आया है। इसी कारण लोगों को दो फरवरी को महारैली निकालनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इस तरह के दबाव को बनाए रखने के लिए हर दूसरे या तीसरे दिन मशाल रैली, कैंडल मार्च और अन्य शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।


धरना स्थल पर व्यवस्थाएं मजबूत

वक्ताओं ने अब तक चले आंदोलन की सफलता का श्रेय स्थानीय पार्षदों और क्षेत्रवासियों को दिया। धरना स्थल पर लोगों को धूप से राहत देने के लिए टेंट की व्यवस्था की गई है और अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई।


निष्कर्ष

बापूग्राम वन भूमि विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं और नागरिक अधिकारों से जुड़ा सवाल बन चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धरने में मौजूदगी से आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच प्रभावित परिवारों के हित में कब और क्या निर्णय लेती है।

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