देहरादून/ऋषिकेश | 06 जनवरी 2026
ऋषिकेश क्षेत्र में वन भूमि से जुड़े सर्वे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। आयोग ने निर्दोष नागरिकों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री से सचिवालय में हुई मुलाकात
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट की। इस दौरान उन्होंने एक पत्र सौंपते हुए निवेदन किया कि ऋषिकेश के बापुग्राम, गुमानीवाला, सुमन विहार सहित संबंधित क्षेत्रों में हुए घटनाक्रम के बाद जिन निर्दोष नागरिकों को आरोपी बनाकर मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें जनहित में वापस लिया जाए।
सर्वे कार्रवाई के दौरान बिगड़े हालात
आयोग ने पत्र में उल्लेख किया कि जब वन भूमि के सर्वे और अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची, तो परिस्थितियां अचानक गंभीर हो गईं। क्षेत्र में भ्रम और असमंजस का माहौल बन गया, जिसके चलते बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक वहां एकत्र हो गए। यह स्थिति किसी सुनियोजित विरोध का परिणाम नहीं थी।
निर्दोष नागरिक भी आए मुकदमों की चपेट में
घटना के बाद कई नागरिकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज कर दिए गए। महिला आयोग का कहना है कि इन मामलों में अनेक निर्दोष लोग भी फंस गए हैं, जिनमें से कई अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। ऐसे में मुकदमों का मानसिक और सामाजिक प्रभाव उनके परिवारों पर गंभीर रूप से पड़ रहा है।
मानवीय और संवेदनशील निर्णय की अपेक्षा
महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मुख्यमंत्री से अपेक्षा जताई कि सरकार इस पूरे प्रकरण को संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से देखेगी। उन्होंने कहा कि यदि निर्दोष नागरिकों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाते हैं, तो इससे न केवल प्रभावित परिवारों को मानसिक संबल मिलेगा, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास भी और मजबूत होगा।
निष्कर्ष
ऋषिकेश वन सर्वे प्रकरण में महिला आयोग की यह पहल प्रशासनिक कार्रवाई और मानवीय संवेदना के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें सरकार के निर्णय पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि निर्दोष नागरिकों को राहत मिलती है या नहीं, और जनता का भरोसा किस हद तक मजबूत होता है।



