BREAKING

एंजेल चकमा हत्याकांड: सूना पड़ा आंगन, गांव की आंखें नम, पिता बोले—अब मदद नहीं, सिर्फ न्याय चाहिए

त्रिपुरा | माछीमार गांव | 3 जनवरी 2026

त्रिपुरा के बांग्लादेश सीमा से सटे माछीमार गांव में आज सन्नाटा पसरा है। जिस घर से कभी उम्मीदों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब मातम है। बेहतर भविष्य के सपने लेकर देहरादून गया एंजेल चकमा अब कभी अपने गांव नहीं लौटेगा। उसकी असामयिक मौत ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।


पूर्व सांसद तरुण विजय ने परिजनों से की मुलाकात

शुक्रवार को पूर्व सांसद तरुण विजय माछीमार गांव पहुंचे और एंजेल चकमा के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि इस मामले में हर संभव सहयोग किया जाएगा और न्याय की लड़ाई में वे अकेले नहीं हैं।


सीमावर्ती गांव, सीमित अवसर और टूटे सपने

पूर्व सांसद ने बताया कि माछीमार गांव बांग्लादेश सीमा से लगा हुआ है, जहां शिक्षा और रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। यही कारण है कि यहां के युवा बेहतर भविष्य की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। एंजेल भी इन्हीं उम्मीदों के साथ देहरादून गया था, लेकिन उसकी मौत ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है।


घर में बौद्ध परंपराओं के बीच गम

एंजेल के घर में शोक का माहौल है। पिता, भाई और दादा सात दिवसीय बौद्ध पूजा में शामिल हैं, जबकि मां बेटे की अंतिम शांति से जुड़े कर्मकांडों में लगी हुई हैं। हर आंख नम है और हर चेहरा अपने लाल की याद में गमगीन।


“पैसे नहीं, बेटे के लिए न्याय चाहिए”

परिजनों से बातचीत के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। एंजेल के पिता ने बताया कि बेटे ने हाल ही में मां से कहा था कि उसे एक लाख रुपये मासिक वेतन की नौकरी मिल गई है और वह जल्द ही उसे देहरादून ले जाएगा।
लेकिन आज पिता की मांग साफ है—“हमें आर्थिक मदद नहीं चाहिए, हमें अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए।”


जांच पर उठे सवाल, दायरा बढ़ाने की मांग

परिजनों ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एंजेल से विवाद में शामिल मकान मालिक की भूमिका की निष्पक्ष और गहन जांच नहीं की जा रही है। परिवार ने जांच का दायरा बढ़ाने और सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच करने की मांग की है।


राजनीतिक रंग देने की कोशिशों की निंदा

पूर्व सांसद तरुण विजय ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर-पूर्व भारत एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इस तरह के मामलों को राजनीतिक या क्षेत्रीय रंग देना देशहित के खिलाफ है। उन्होंने एंजेल चकमा की हत्या जैसे जघन्य अपराध को राजनीतिक रूप देने की कोशिशों की कड़ी निंदा की।


निष्कर्ष

एंजेल चकमा की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के सपनों पर सवाल है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में अपने घर-गांव छोड़ते हैं। माछीमार गांव आज शोक में डूबा है और परिजनों की एक ही गुहार है—दोषियों को सख्त सजा मिले और एंजेल को न्याय। अब पूरे देश की निगाहें इस मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की दिशा में उठने वाले कदमों पर टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *