देहरादून | 6 फरवरी 2026
गाजियाबाद में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी दर्दनाक घटना के बाद देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। बच्चों और किशोरों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत को गंभीर सामाजिक खतरा मानते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। इसका उद्देश्य बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना और अभिभावकों व शिक्षण संस्थानों को जागरूक बनाना है।
स्कूलों को विशेष दिशा-निर्देश
जिला प्रशासन की ओर से सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नियमित निगरानी रखी जाए। स्कूल प्रबंधन को कहा गया है कि वे विद्यार्थियों को संतुलित डिजिटल उपयोग के प्रति जागरूक करें और ऑनलाइन गेमिंग के दुष्परिणामों पर चर्चा करें। काउंसलिंग सत्र, अभिभावक-शिक्षक बैठकें और डिजिटल अनुशासन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है।
अभिभावकों की भूमिका अहम
डीएम सविन बंसल ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना केवल स्कूलों की नहीं, बल्कि अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि माता-पिता बच्चों के मोबाइल, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरणों के उपयोग का समय तय करें, संदिग्ध ऐप्स और गेम्स पर नजर रखें तथा बच्चों से नियमित संवाद बनाए रखें।
गाजियाबाद की घटना ने झकझोरा देश
4 फरवरी को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आई घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। एक रिहायशी इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों ने आत्महत्या कर ली। मृतक तीनों नाबालिग थीं, जिनकी उम्र क्रमशः 12, 14 और 16 वर्ष बताई जा रही है।
कोरियन ऑनलाइन गेमिंग ऐप की लत की आशंका
हालांकि घटना के पीछे की सटीक वजह की जांच जारी है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार तीनों बहनें एक कोरियन ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेमिंग ऐप की लत का शिकार थीं। पुलिस के मुताबिक, मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें लिखा था— “मम्मी, पापा, सॉरी।” बताया जा रहा है कि माता-पिता बच्चों की गेमिंग आदतों को लेकर उन्हें लगातार समझाते थे।
पहला मामला नहीं, बढ़ती चिंता
ऑनलाइन गेमिंग के कारण आत्महत्या का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे कई चौंकाने वाले मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित डिजिटल उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है।
निष्कर्ष
गाजियाबाद की त्रासदी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि ऑनलाइन गेमिंग की लत एक गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। देहरादून प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी एक समय रहते उठाया गया जरूरी कदम है। अब जरूरत है कि स्कूल, अभिभावक और समाज मिलकर बच्चों को सुरक्षित, संतुलित और जिम्मेदार डिजिटल जीवन की ओर मार्गदर्शन दें, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


