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कलश यात्रा के साथ देहरादून में प्रथम तीन दिवसीय भगवान श्री घंटाकर्ण जी पाठ का शुभारंभ

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तिथि: 21 दिसंबर 2025 से 23 दिसंबर 2025

देहरादून में 21 दिसंबर से 23 दिसंबर 2025 तक आयोजित होने वाले प्रथम तीन दिवसीय भगवान श्री घंटाकर्ण (घंडियाल) जी के पाठ की भव्य शुरुआत सोमवार को कलश यात्रा के साथ हुई। यह धार्मिक आयोजन शहर के महालक्ष्मी वेडिंग पॉइंट में आयोजित किया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिली।


नागेश्वर शिव मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा

कार्यक्रम की शुरुआत नागेश्वर शिव मंदिर से हुई, जहां से सैकड़ों श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर कथा स्थल तक भव्य कलश यात्रा निकाली। ढोल-दमाऊं की गूंज के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने जयकारों और भजनों के साथ भगवान श्री घंटाकर्ण जी का स्मरण किया।


विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कथा का आरंभ

कलश यात्रा के उपरांत कथा स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद भगवान श्री घंटाकर्ण जी की कथा का शुभारंभ हुआ। कथा व्यास आचार्य पंडित लोकेंद्र बिजल्वाण ने भगवान घंडियाल के दिव्य और भव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए उनकी महिमा, लोक मान्यताओं और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।


मंत्रोच्चार से हुआ विधिवत पूजन

इस अवसर पर आचार्य पंडित विनोद कोठारी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन संपन्न कराया गया। मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे पंडाल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।


समाज के गणमान्य लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सजवाण वंश हितकारिणी कमेटी के अध्यक्ष त्रिलोक सजवाण, कोषाध्यक्ष हरेंद्र सजवाण, उपासक कुलबीर सजवाण, वीरेंद्र सजवाण, चित्रपाल सजवाण, सुमन सिंह सजवाण, डॉ. जगमोहन सजवाण, संदीप सजवाण, दीवान सिंह सजवाण, नीलम सजवाण, सुषमा सजवाण, प्रिती सजवाण, माया, बीना, किरण, रिंकी, बिंदु सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।


तीन दिन तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान

आयोजकों के अनुसार भगवान श्री घंटाकर्ण जी की यह कथा और पाठ लगातार तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन कथा, पूजन और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


निष्कर्ष

भगवान श्री घंटाकर्ण जी के तीन दिवसीय पाठ का यह आयोजन देहरादून में श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर संगम प्रस्तुत कर रहा है। कलश यात्रा से प्रारंभ हुआ यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत कर रहा है, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने का भी कार्य कर रहा है।

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