तारीख: 27 नवंबर 2025 | स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को वापस भेज दिया गया। यह प्रस्ताव शिक्षकों के चयन वेतनमान और प्रोन्नत वेतनमान से जुड़ा था, जिसे परीक्षण के बाद दोबारा कैबिनेट में लाए जाने का निर्णय लिया गया है।
क्या था प्रस्ताव का मुद्दा?
कैबिनेट में शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के वेतन निर्धारण से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया था।
इसमें बताया गया कि चतुर्थ, पंचम और छठे वेतनमान से ही शिक्षकों को उनकी नियमित सेवा अवधि के आधार पर चयन और प्रोन्नत वेतनमान दिए जाते रहे हैं।
वेतन निर्धारण की पुरानी व्यवस्था
शिक्षकों का वेतन उनके मूल (साधारण) वेतनमान के आधार पर अगले स्तर पर तय किया जाता था।
इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वेतनवृद्धि का प्रावधान नहीं था।
13 सितंबर 2019 के शासनादेश में भी यह साफ कर दिया गया था कि चयन या प्रोन्नत वेतनमान दिए जाने पर वेतनवृद्धि नहीं होगी।
क्यों लौटा प्रस्ताव?
इस बार कैबिनेट में उत्तराखंड सरकारी सेवक वेतन नियमावली 2016 के नियम 13 में स्पष्टता के लिए संशोधन प्रस्ताव पेश किया गया था।
लेकिन कैबिनेट ने इसे यह कहते हुए लौटा दिया कि:
“पहले प्रस्ताव का पूरी तरह परीक्षण हो, उसके बाद ही इसे दोबारा कैबिनेट के सामने लाया जाए।”
समूह ‘घ’ पदों से जुड़ा प्रस्ताव भी लौटा
स्थान: देहरादून
कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी परीक्षण के लिए वापस भेज दिया।
यह प्रस्ताव उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज (काशीपुर) और बीएसवी इंटर कॉलेज (जसपुर), ऊधमसिंह नगर से जुड़ा था।
दोनों संस्थानों में चतुर्थ श्रेणी के सात-सात पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने की सहमति नहीं दी गई थी।
इसके स्थान पर ये पद आउटसोर्स मोड पर नियत मानदेय के साथ सृजित करने का सुझाव दिया गया था।
लेकिन कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर भी परीक्षण की आवश्यकता बताते हुए इसे लौटा दिया।
निष्कर्ष
उत्तराखंड कैबिनेट की इस कार्रवाई से साफ है कि सरकार शिक्षकों के चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान और समूह ‘घ’ की नियुक्तियों से जुड़े मामलों पर किसी भी जल्दबाजी की बजाय कानूनी और प्रशासनिक स्पष्टता को प्राथमिकता दे रही है।
परीक्षण प्रक्रिया के पूरा होने के बाद दोनों प्रस्तावों को फिर से कैबिनेट में लाया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भ्रम या विवाद की स्थिति न बने।


