वहीं, जाइलारियम के निरीक्षण के दौरान एफआरआइ के विज्ञानियों ने बताया कि भारत और 45 अन्य देशों की लकड़ी के 20 हजार नमूने संरक्षित किए गए हैं। आयोग के साथ भारत में पाई जाने वाली बेशकीमती प्रजातियों और उनके वाणिज्यिक उपयोग की जानकारी भी आयोग के साथ साझा की गई।जिसमें मुख्य रूप से लाल चंदन, चंदन, सागौन, साल और शीशम के बारे में बताया गया। आयोग ने इस बात पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि वन अनुसंधान और इसके सभी घटकों पर उन्नत विरासत को संजोने की दिशा में बेहतर काम किया गया है।