देहरादून | 14 फरवरी 2026
देहरादून में झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या ने अपराध जगत और सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। ताइक्वांडो सिखाने से करियर शुरू करने वाला विक्रम कब झारखंड की अंडरवर्ल्ड का बड़ा चेहरा बन गया, इसकी कहानी जितनी चौंकाने वाली है उतनी ही खौफनाक भी। कई हत्याओं, बम धमाकों और गोलीकांडों में साजिशकर्ता के रूप में उसका नाम सामने आ चुका था।
उत्तराखंड से झारखंड तक का सफर
विक्रम शर्मा मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला था। उसके पिता अमित लाल टाटा स्टील में नौकरी मिलने के बाद परिवार के साथ झारखंड के जमशेदपुर शिफ्ट हो गए। यही से विक्रम के जीवन की दिशा बदल गई। ताइक्वांडो का शौकीन विक्रम तत्कालीन बीएमपी ग्राउंड में युवाओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देता था।
छात्र बना कुख्यात गैंगस्टर
इसी दौरान झारखंड का कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह उसका छात्र बना। विक्रम का छोटा भाई अरविंद शर्मा अखिलेश का करीबी दोस्त था, जिससे दोनों परिवारों में घरेलू संबंध भी बन गए। यही संबंध आगे चलकर अपराध की दुनिया में विक्रम की एंट्री का कारण बने।
पहला अपराध और पुलिस से आमना-सामना
वर्ष 1999 में तेल कारोबारी ओम प्रकाश काबरा के अपहरण मामले में पुलिस ने अखिलेश सिंह के साथ विक्रम के घर पर भी छापा मारा। यही पहला मौका था जब विक्रम पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी के रूप में दर्ज हुआ। इस छापेमारी में एक महिला पिंकी की तस्वीर भी मिली, जिसने पूरे अपराध नेटवर्क को उजागर कर दिया।
भाई अरविंद की हत्या और फरारी
पिंकी, कारोबारी अशोक शर्मा की पत्नी थी। वर्ष 1998 में विक्रम के भाई अरविंद शर्मा ने जमशेदपुर में अशोक शर्मा की हत्या कर दी थी। बाद में अरविंद ने पिंकी से शादी कर ली। इस हत्याकांड के बाद से अरविंद शर्मा फरार है और आज तक पुलिस की पकड़ से बाहर है।
हत्या, बम धमाके और साजिशों का मास्टर
सिदगोड़ा थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार के अनुसार, ओम प्रकाश काबरा कांड के बाद विक्रम शर्मा टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम हत्याकांड और बम धमाके में भी साजिशकर्ता के रूप में सामने आया। इन सभी वारदातों को उसने अखिलेश सिंह के साथ मिलकर अंजाम दिया था। वर्तमान में अखिलेश सिंह झारखंड की उपराजधानी दुमका की जेल में बंद है।
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‘थ्री-पी’ फार्मूले में माहिर था विक्रम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विक्रम ‘थ्री पी’ यानी पॉलिटिक्स, प्रेस और पुलिस मैनेजमेंट में माहिर था। बड़े नेताओं से उसके करीबी संबंध थे और वह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी जुटा हुआ था। चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी उसने जेल में बंद अखिलेश सिंह को सौंपी थी, जो अंदर से ही सियासी जोड़-तोड़ कर रहा था।
न्यूज पोर्टल की आड़ में रंगदारी
झारखंड पुलिस के अनुसार, विक्रम शर्मा एक न्यूज पोर्टल भी संचालित करता था, जिसमें कई साझेदार शामिल थे। इस पोर्टल की आड़ में लोगों को ब्लैकमेल कर रंगदारी मांगने के आरोप भी उस पर लगे। आम लोगों और कारोबारियों के बीच उसका जबरदस्त खौफ बना हुआ था।
निष्कर्ष
ताइक्वांडो सिखाने वाला एक साधारण युवक कैसे झारखंड के सबसे प्रभावशाली अपराधियों में शुमार हो गया, विक्रम शर्मा की कहानी इसकी मिसाल है। उसकी हत्या ने भले ही एक नाम को खत्म कर दिया हो, लेकिन उसके नेटवर्क, फरार भाई और अधूरे मामलों ने पुलिस के सामने अब भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में यह हत्या झारखंड और उत्तराखंड दोनों राज्यों की अपराध राजनीति को नई दिशा दे सकती है।





