देहरादून | 14 फरवरी 2026
केंद्र सरकार द्वारा जनगणना को लेकर अधिसूचना जारी होते ही उत्तराखंड में प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाओं को सील कर दिया गया है। अब जनगणना की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने तक राज्य में किसी भी प्रकार का जिला, तहसील, नगर निकाय, पंचायत या वार्ड स्तर पर परिसीमन अथवा पुनर्गठन नहीं किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य जनगणना आंकड़ों की सटीकता, पारदर्शिता और एकरूपता बनाए रखना है।
मकान गणना से होगी जनगणना की शुरुआत
उत्तराखंड में जनगणना प्रक्रिया की शुरुआत मकान सूचीकरण एवं भवन गणना से की जाएगी। यह पहला चरण 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें राज्य के प्रत्येक आवासीय और व्यावसायिक भवन का विवरण दर्ज किया जाएगा। इसी आधार पर आगे की जनसंख्या गणना की रूपरेखा तैयार होगी।
तीन चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया
राज्य में जनगणना कुल तीन चरणों में संपन्न कराई जाएगी—
पहला चरण:
25 अप्रैल से 24 मई 2026 — मकान सूचीकरण एवं भवन गणना
दूसरा चरण:
11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 — चयनित क्षेत्रों में जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों का संग्रह
तीसरा चरण:
9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 — शेष क्षेत्रों में देशव्यापी जनगणना के साथ अंतिम आंकड़ा संकलन
बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण की तैयारी
जनगणना को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। 16 फरवरी 2026 से चार्ज अधिकारियों का प्रशिक्षण आरंभ होगा।
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23 अधिकारी मास्टर ट्रेनर बनाए जाएंगे
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ये मास्टर ट्रेनर 555 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे
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इसके बाद 4,000 से अधिक पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा
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फील्ड स्तर पर लगभग 30,000 कर्मियों की तैनाती होगी
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प्रत्येक बैच में 40 कर्मचारियों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा
सीमाएं स्थिर रखना क्यों जरूरी?
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जनगणना के दौरान सीमाओं में बदलाव होने से आंकड़ों में भ्रम और त्रुटियों की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि जनगणना पूरी होने तक—
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नई नगर पालिका या नगर पंचायत का गठन नहीं होगा
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ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन नहीं किया जाएगा
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वार्डों और तहसीलों की सीमाएं यथावत रहेंगी
हिमालयी राज्यों से हो रही शुरुआत
सचिव जनगणना दीपक कुमार ने बताया कि हिमालयी राज्यों में जनगणना की शुरुआत मकान गणना से की जा रही है। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है और सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से कार्य करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
निष्कर्ष
जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाती है, जिसके आधार पर नीतियां, योजनाएं और संसाधनों का वितरण तय होता है। उत्तराखंड में प्रशासनिक सीमाओं को सील करने का निर्णय आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। अब 2027 तक राज्य में कोई भी क्षेत्रीय बदलाव नहीं होगा, जिससे जनगणना का कार्य निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।


