BREAKING

ठंड में ‘सोया’ सर्पबाड़ा, बाघ-गुलदार बने आकर्षण: देहरादून चिड़ियाघर में जानवरों के लिए कंबल, हीटर और खास डाइट

 

स्थान : देहरादून
दिनांक : 11 जनवरी 2026

देहरादून चिड़ियाघर में कड़ाके की ठंड का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। तापमान गिरते ही सांप, अजगर और इगुआना जैसे सरीसृप शीत निद्रा (हाइबरनेशन) में चले गए हैं, जिससे सर्पबाड़ा लगभग सूना नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर बाघ, गुलदार और अन्य स्तनधारी वन्यजीव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जिससे चिड़ियाघर में रौनक बनी हुई है।


चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार ठंड बढ़ने के साथ ही रेप्टाइल प्रजाति के सभी जीव निष्क्रिय अवस्था में पहुंच चुके हैं। चिड़ियाघर के प्रभारी रेंजर विनोद लिंगवाल ने बताया कि सांप, अजगर और इगुआना अब फरवरी माह तक सक्रिय नहीं होंगे। इस वर्ष ठंड अपेक्षाकृत देर से पड़ी, इसलिए सरीसृप भी सामान्य समय से कुछ देरी से शीत निद्रा में गए हैं।


इन दिनों स्नेक हाउस में सांप कंबल और बुरादे के बीच छिपे हुए हैं। ठंड से बचाव के लिए बाड़ों में हीटर लगाए गए हैं और तापमान नियंत्रित रखा जा रहा है, बावजूद इसके हाइबरनेशन के कारण पर्यटकों को सांपों का दीदार नहीं हो पा रहा है। सर्पबाड़े में किंग कोबरा, इंडियन कोबरा, रसल वाइपर समेत कुल 11 प्रजातियों के सरीसृप रखे गए हैं, जो सभी शीत-रक्तीय (कोल्ड ब्लडेड) जीव हैं।


बाघ और गुलदार बने पर्यटकों का मुख्य आकर्षण

सरीसृपों की अनुपस्थिति के बीच बाघ और गुलदार चिड़ियाघर की शान बने हुए हैं। हालांकि ठंड का असर इन पर भी दिख रहा है और वे दिनभर धूप सेंकते नजर आ रहे हैं। चिड़ियाघर के पशुचिकित्सक डॉ. प्रदीप मिश्रा के अनुसार ठंड के मौसम को देखते हुए बंगाल टाइगर के आहार में बदलाव किया गया है।


बाघ को प्रतिदिन करीब नौ किलो मांस के साथ गुड़, कच्चा अंडा, शहद और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट दिए जा रहे हैं, ताकि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। गुलदार और अन्य मांसाहारी जीवों की सेहत पर भी नियमित निगरानी रखी जा रही है।


जानवरों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम

ठंड से बचाव के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। हिरणों को गुड़, अजवाइन और हींग मिला गुनगुना पानी दिया जा रहा है। जो जीव अंडा खाते हैं, उन्हें सुबह-शाम अंडे दिए जा रहे हैं। बाड़ों की छत पर पराली और जमीन पर कंबल बिछाए गए हैं। साथ ही तापमान पर नजर रखने के लिए थर्मामीटर लगाए गए हैं।


मकाऊ तोतों के लिए खास डाइट

दक्षिण अमेरिका के जंगलों में पाए जाने वाले रंग-बिरंगे मकाऊ तोतों के लिए अलग डाइट तय की गई है। इन्हें अखरोट, काजू जैसे ड्राई फ्रूट दिए जा रहे हैं। ये तोते सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही सक्रिय हो जाते हैं और अपनी तेज आवाज से पूरे परिसर को जीवंत बना देते हैं।


स्नेक हाउस में मौजूद प्रजातियां

  • बर्मीज पाइथन
  • रसल वाइपर
  • किंग कोबरा
  • इंडियन कोबरा
  • सैंड बोआ
  • रेटिकुलेटेड पाइथन
  • रॉक पाइथन
  • ट्री स्नेक
  • रैट स्नेक
  • बॉल पाइथन
  • इगुआना

निष्कर्ष:

कड़ाके की ठंड ने देहरादून चिड़ियाघर के स्वरूप को बदल दिया है। जहां सरीसृप शीत निद्रा में हैं, वहीं बाघ और गुलदार पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा किए गए हीटर, कंबल और विशेष आहार जैसे इंतजाम यह दर्शाते हैं कि ठंड के मौसम में भी वन्यजीवों की सेहत और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *