देहरादून | 10 अप्रैल 2026 (शुक्रवार)
उत्तराखंड में सोलर ऊर्जा क्षेत्र पर डॉलर की बढ़ती कीमत का सीधा असर देखने को मिल रहा है। रुपये की गिरती साख के चलते सोलर पावर प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ गई है, जिससे राज्य में सोलर प्लांट लगाना अब पहले से अधिक महंगा हो गया है। इस बीच उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई दरों का ड्राफ्ट जारी करते हुए आम जनता और हितधारकों से 4 मई तक सुझाव मांगे हैं।
आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट में सोलर पीवी, सोलर कैनाल, रूफटॉप सोलर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) और सोलर थर्मल प्रोजेक्ट्स की दरों में बदलाव प्रस्तावित किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, एक अप्रैल 2026 या उसके बाद शुरू होने वाले सोलर पीवी प्रोजेक्ट्स की पूंजीगत लागत 285.32 लाख रुपये प्रति मेगावाट तय की गई है, जो पिछले वर्ष 278.40 लाख रुपये प्रति मेगावाट थी।
लागत में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण सोलर मॉड्यूल की कीमतों में बदलाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर का लगभग 92.28 रुपये तक पहुंचना बताया गया है। हालांकि सरकार ने जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत और आयात शुल्क को 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद कुल लागत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बिजली दरों में प्रस्तावित बदलाव
आयोग के ड्राफ्ट के अनुसार विभिन्न सोलर प्रोजेक्ट्स की बिजली दरों में आंशिक कमी प्रस्तावित की गई है:
- सोलर पीवी: 4.10 से घटाकर 3.96 रुपये प्रति यूनिट
- नहर किनारे (कैनाल बैंक): 4.31 से घटाकर 4.09 रुपये प्रति यूनिट
- नहर के ऊपर (कैनाल टॉप): 4.48 से घटाकर 4.26 रुपये प्रति यूनिट
- रूफटॉप सोलर (नेट मीटरिंग): 2.00 रुपये प्रति यूनिट (कोई बदलाव नहीं)
बैटरी स्टोरेज सिस्टम हुआ सस्ता
ग्रिड की स्थिरता और रिन्यूएबल एनर्जी के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की दरों में भी कटौती की है। पिछले वर्ष जहां बीईएसएस से यूपीसीएल को मिलने वाली बिजली का टैरिफ 3,96,000 रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह था, वहीं अब इसे घटाकर 2,54,583 रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह प्रस्तावित किया गया है। इसके साथ ही इसकी लागत 160 लाख रुपये प्रति मेगावाट तय की गई है।
सब्सिडी लेने पर और घटेगा टैरिफ
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रोजेक्ट डेवलपर को केंद्र या राज्य सरकार से सब्सिडी या वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है, तो उसी अनुपात में बिजली की दरों में कमी की जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी परियोजना को 26 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है तो उसका टैरिफ 3.96 रुपये प्रति यूनिट से घटकर लगभग 3.57 रुपये प्रति यूनिट रह जाएगा।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच लागत में बढ़ोतरी और दरों में कटौती का यह संतुलन नीति-निर्माताओं के लिए चुनौती बना हुआ है। अब सभी की नजर 4 मई तक मिलने वाले सुझावों पर टिकी है, जिनके आधार पर अंतिम दरें तय की जाएंगी। यह फैसला राज्य में सोलर निवेश और उपभोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।


