संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष ने कहा कि सिविल सोसायटी से बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि अप्रैल- मई यहां पर्यटन का पीक सीजन होते हैं। ऐसे में इस अवधि में चुनाव कराने से पर्यटन प्रभावित हो सकता है।कारण, इस दौरान सभी चुनावों में व्यस्त रहेंगे। ऐसे में अलग-अलग चुनाव होने से पर्यटन प्रभावित हो सकता है। साथ ही बार-बार चुनाव होने से यहां शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगने और स्कूलों में पोलिंग बूथ बनने से पठन-पाठन का कार्य भी प्रभावित होता है।

मौसम भी चुनाव को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि देश में 4.85 करोड़ मजदूर ऐेसे हैं जो दूसरे राज्यों में काम करते हैं। ऐसे में बार-बार चुनाव के दौरान उन्हें अपने राज्यों में जाना पड़ता है। इससे उद्योग भी प्रभावित होते हंै। इन्हीं सब बातों को देखते हुए इस विषय पर अभिभावकों, व्यापारियों सहित सभी वर्गों से बात करने को कहा गया है।

मतदान प्रतिशत पर भी पड़ता है असर

समिति के अध्यक्ष ने एक सवाल के जवाब में कहा कि बार-बार चुनाव होने से इसका असर मतदान प्रतिशत पर भी नजर आता है। एक साथ चुनाव होने से यह प्रतिशत बढ़ सकता है।

जनता के लिए है विधेयक

समिति के अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। समिति में जितने भी सदस्य हैं सब अलग-अलग राजनीतिक दलों से हैं। संसद के भीतर उनकी जो भी भूमिका हो, लेकिन समिति के सदस्य के रूप में सभी संसदीय परंपराओं के अनुसार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो भी दिक्कत बताई जा रही है, समिति उसका समाधान निकालने का प्रयास कर रही है।