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त्रिपुरा छात्र हत्याकांड: सीएम धामी का पीड़ित परिवार को भरोसा, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

देहरादून | 29 दिसंबर 2025

घटना का विवरण

त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के नंदानगर निवासी छात्र एंजेल चकमा की पिटाई के बाद इलाज के दौरान मौत से पूरे देश में आक्रोश है। जानकारी के अनुसार, 9 दिसंबर को कुछ युवकों द्वारा की गई बेरहमी से पिटाई के बाद एंजेल गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद बीते दिन उसकी मौत हो गई।


सीएम धामी ने जताया शोक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को एंजेल चकमा के पिता तरुण प्रसाद चकमा से फोन पर बातचीत कर गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दुख की घड़ी में वह व्यक्तिगत तौर पर परिवार के दर्द को समझते हैं और सरकार पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है।


आरोपियों पर कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, एक अन्य आरोपी के नेपाल भागने की आशंका जताई गई है। उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया गया है और पुलिस लगातार दबिश दे रही है। सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।


उत्तराखंड की छवि पर आघात

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड हमेशा से शांत और सौहार्दपूर्ण राज्य रहा है, जहां देश-विदेश से छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसी घटना राज्य की छवि के विपरीत है और बेहद दुखद है। सरकार ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए सख्त कार्रवाई करेगी।


केंद्र और राज्यों से संवाद

मुख्यमंत्री ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी बातचीत की है। सभी स्तरों पर मामले की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है।


पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता

सीएम धामी ने भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड सरकार पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। इसके लिए वह स्वयं त्रिपुरा के मुख्यमंत्री से भी समन्वय करेंगे ताकि परिवार को किसी तरह की परेशानी न हो।


निष्कर्ष

त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। उत्तराखंड सरकार का सख्त रुख और शीर्ष स्तर पर हो रही कार्रवाई से उम्मीद है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा। यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता की भी बड़ी परीक्षा है।

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