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दिव्यांग दंपती से अभद्रता, सार्वजनिक नल से पानी लेने पर रोक का आरोप, न्याय की गुहार लेकर तहसील पहुंचे बुजुर्ग दंपती, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

स्थान : आरा गांव, तहसील क्षेत्र (उत्तराखंड)
तारीख : 22 दिसंबर 2025

उत्तराखंड के एक ग्रामीण क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दिव्यांग बुजुर्ग दंपती को न सिर्फ कथित रूप से अपमान और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें गांव के सार्वजनिक नल से पीने का पानी लेने से भी रोका जा रहा है। अपनी पीड़ा लेकर यह दंपती तहसील मुख्यालय पहुंचा और कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठकर न्याय की आस में प्रशासन का ध्यान खींचा।


तहसील की सीढ़ियों पर बैठकर सुनाई व्यथा

घटनाक्रम के अनुसार ग्राम आरा निवासी 75 वर्षीय दिव्यांग दल्लू दास और उनकी पत्नी सल्लो देवी मंगलवार को तहसील मुख्यालय पहुंचे। दोनों कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठ गए। इसी दौरान उप जिलाधिकारी प्रेमलाल की नजर दंपती पर पड़ी। जब उन्होंने कारण पूछा तो दंपती ने अपनी आपबीती सुनाई।


ग्रामीणों पर गंभीर आरोप

दंपती ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोग उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। आए दिन उनके साथ अभद्रता, मारपीट और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं। इतना ही नहीं, सार्वजनिक नल से पीने और पानी भरने पर भी पाबंदी लगा दी गई है, जिससे उनका जीवन बेहद कठिन हो गया है।


शिकायत मिलते ही प्रशासन सक्रिय

दंपती ने अपनी शिकायत लिखित रूप में उप जिलाधिकारी को सौंपी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी प्रेमलाल ने नायब तहसीलदार राजेंद्र लाल को तत्काल मौके पर भेजकर जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।


अधिकारियों का बयान

उप जिलाधिकारी प्रेमलाल ने बताया कि मामले की जांच के लिए नायब तहसीलदार को गांव भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी सार्वजनिक संसाधनों से वंचित करना या दिव्यांग व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


निष्कर्ष

यह मामला न केवल कानून व्यवस्था, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। दिव्यांग और बुजुर्ग दंपती के साथ कथित अमानवीय व्यवहार प्रशासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी है। अब निगाहें प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे पीड़ित दंपती को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


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