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देवभूमि में डर का साया: देहरादून में महिला अपराध बेलगाम, पुलिस की लापरवाही पर उठे तीखे सवाल

 

देहरादून, दिनांक: 2 फरवरी 2026

देहरादून, जिसे कभी शांत व सुरक्षित राजधानी के रूप में जाना जाता था, आज महिला अपराधों के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता के केंद्र में आ गया है। राजधानी में दिनदहाड़े हुई एक युवती की नृशंस हत्या ने न केवल शहर को झकझोर दिया है, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वारदात उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक भयावह तस्वीर पेश करती है।


शहर के व्यस्ततम मछली बाजार क्षेत्र में चापड़ से गला रेतकर की गई युवती की हत्या ने आमजन में दहशत फैला दी। घटना इसलिए भी अधिक चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि पीड़िता ने हत्या से महज दो दिन पहले ही आरोपित के खिलाफ धमकी दिए जाने की शिकायत स्थानीय पुलिस चौकी में दर्ज कराई थी। इसके बावजूद पुलिस की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।


इस लापरवाही का परिणाम एक जघन्य हत्या के रूप में सामने आया, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब पीड़िता ने खुद खतरे की आशंका जताई थी, तो आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या धमकी की शिकायतें केवल कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं?


विपक्ष का सरकार पर हमला

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। पूर्व विधायक राजकुमार समेत कई कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देहरादून में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। नेताओं का आरोप है कि जब राजधानी में ही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।


व्यापारियों में आक्रोश, सुरक्षा की मांग

भरे बाजार में दिनदहाड़े हुई हत्या से व्यापारी वर्ग में भी रोष है। स्थानीय व्यापारी सुनील कुमार बांगा ने कहा कि बाजार क्षेत्रों में पुलिस गश्त न के बराबर है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। व्यापारियों ने बाजारों में स्थायी पुलिस चौकी, व्यापक सीसीटीवी निगरानी और नियमित पैदल गश्त की मांग उठाई है।


पुलिस के दावे बनाम जमीनी हकीकत

देहरादून में हाल के महीनों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, धमकी, घरेलू हिंसा और हत्या जैसे मामलों में लगातार इजाफा देखा गया है। इसके बावजूद कई मामलों में पीड़िताओं की शिकायतों पर पुलिस की ढिलाई सामने आई है। बीते एक सप्ताह के भीतर जिले में तीन महिलाओं की हत्या ने दूनवासियों के मन में असुरक्षा का गहरा भाव पैदा कर दिया है।


उत्तराखंड में महिला अपराधों की भयावह तस्वीर

देवभूमि की शांत वादियों के पीछे महिला अपराधों का एक ऐसा अंधेरा छिपा है, जो सरकारी आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय से जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में महिला अपराध हर साल नए रिकार्ड बना रहे हैं।


तीन साल में 1822 दुष्कर्म, 1796 अपहरण
वर्ष 2021 से 2023 के बीच राज्य में महिलाओं के खिलाफ 1822 दुष्कर्म और 1796 अपहरण के मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।


पांच साल में 10,500 महिलाएं व बालिकाएं गुमशुदा
पिछले पांच वर्षों में उत्तराखंड में 10,500 महिलाएं और बालिकाएं लापता हुईं। पुलिस 9,733 को खोजने में सफल रही, लेकिन 757 महिलाएं और बालिकाएं आज भी लापता हैं।


वर्षवार गुमशुदगी की स्थिति

  • 2021: 1494 महिलाएं व 404 बालिकाएं गुम; 62 महिलाएं और 6 बालिकाएं अब भी लापता
  • 2022: 1632 महिलाएं व 425 बालिकाएं गुम; 79 महिलाएं और 8 बालिकाएं नहीं मिलीं
  • 2023: 1764 महिलाएं व 716 बालिकाएं गुम; 75 महिलाएं और 9 बालिकाएं लापता
  • 2024: 1953 महिलाएं व 838 बालिकाएं गुम; 153 महिलाएं और 25 बालिकाएं अब भी गायब

अज्ञात शव: महिला अपराध का सबसे डरावना सच

पिछले पांच वर्षों में राज्य में 318 अज्ञात महिला शव बरामद किए गए, जिनमें से केवल 87 की पहचान हो सकी। शेष 231 महिलाएं आज भी अज्ञात हैं।


वर्षवार अज्ञात शवों की स्थिति

  • 2021: 74 शव, 27 की पहचान
  • 2022: 50 शव, 17 की पहचान
  • 2023: 77 शव, 18 की पहचान
  • 2024: 88 शव, 19 की पहचान
  • 2025: 29 शव, केवल 6 की पहचान

निष्कर्ष

देहरादून में दिनदहाड़े हुई हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता का प्रतीक है। बढ़ते आंकड़े, लापरवाही की शिकायतें और असुरक्षा का माहौल इस बात की मांग कर रहा है कि महिला सुरक्षा को केवल घोषणाओं तक सीमित न रखा जाए। जब तक शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, सख्त कानून और जमीनी स्तर पर प्रभावी पुलिसिंग नहीं होगी, तब तक देवभूमि में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा सवाल बनी रहेगी।

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