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देहरादून अर्जुन हत्याकांड: सड़क पर बिखरे खून से सने अनानास, मोलभाव के कुछ मिनट बाद मौत की गोली

देहरादून | दिनांक: 12 फरवरी 2026


देहरादून के तिब्बती मार्केट में बुधवार को जो कुछ हुआ, उसने पूरे शहर को सन्न कर दिया। कारोबारी और टेनिस खिलाड़ी अर्जुन शर्मा की हत्या केवल एक वारदात नहीं थी, बल्कि हर दृश्य अपने भीतर एक दर्दनाक कहानी समेटे हुए था। घटनास्थल पर सड़क पर बिखरे खून से सने अनानास के टुकड़े अर्जुन के आखिरी पलों की मूक गवाही दे रहे थे।


दुकान पर इंतजार, बाहर निकलते ही हमला

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर काफी देर से फल की दुकान के पास खड़े थे। वे पूरी तरह अर्जुन के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे। टेनिस खेलने के बाद अर्जुन जैसे ही बाहर आए, हमलावर सक्रिय हो गए। अर्जुन ने पहले अपनी कार में टेनिस किट रखी और फिर फल खरीदने दुकान की ओर बढ़े।


मोलभाव के बीच सामान्य बातचीत

फल विक्रेता ने बताया कि अर्जुन ने अनानास खरीदते समय सामान्य अंदाज में मोलभाव भी किया था। उन्होंने कहा था—“सही दाम लगा लो, रोज तुमसे ही फल लिया करूंगा।” किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी।


गोली और खामोशी

अर्जुन अनानास लेकर जैसे ही लौटे, तभी घात लगाए बैठे हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। गोली लगते ही अर्जुन सड़क पर गिर पड़े। तिब्बती मार्केट के गेट नंबर सात और आठ के बीच यह वारदात हुई। जब तक फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची, कटे हुए अनानास के टुकड़े खून में सने सड़क पर पड़े रहे।


गैस एजेंसी से जुड़ा विवाद बना हत्या की जड़

अर्जुन हत्याकांड की जड़ बलिदानी कोटे से परिवार को मिली अमरदीप गैस एजेंसी बताई जा रही है। अर्जुन के पिता के बलिदान के बाद यह एजेंसी उनकी मां के नाम पर आवंटित हुई थी। कारोबार चलाने के लिए बैंक से लोन लिया गया था, जबकि बाद में संपत्ति को बंधक रखकर और भी ऋण उठाने की बात सामने आ रही है।


एजेंसी बेचने को लेकर टकराव

सूत्रों के अनुसार, अर्जुन की मां इस गैस एजेंसी और उससे जुड़ी संपत्ति को बेचना चाहती थीं, जबकि अर्जुन इसके सख्त खिलाफ थे। जब अर्जुन को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने बैंक में शिकायत कर दी। बैंक ने जांच के बाद बंधक संपत्ति को बेचने पर आपत्ति दर्ज कर दी।


डॉक्टर अजय खन्ना की एंट्री

यहीं से इस कहानी में शहर के नामी डॉक्टर अजय खन्ना की एंट्री होती है। बताया जा रहा है कि अर्जुन की मां के कहने पर डॉक्टर अजय खन्ना और उनके सहयोगियों ने एजेंसी पर चल रहे लोन की राशि चुका दी। इसके बाद बैंक की ओर से यह संपत्ति पूरी तरह मुक्त हो गई। अब सवाल उठता है कि जब करोड़ों रुपये लोन चुकाने में लगे, तो उनकी भरपाई कैसे होगी?


उलझते किरदार, एक जान गई

इसी उलझन भरी कहानी में कई किरदार सामने आते हैं—मां, डॉक्टर, बैंक और संपत्ति। किसी एक कड़ी पर तनाव इस कदर बढ़ा कि भाड़े के शूटर बुलाए गए और अर्जुन की जिंदगी खत्म कर दी गई। दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने दून की शांति और सुरक्षा की छवि पर गहरा दाग छोड़ दिया है।


निष्कर्ष

देहरादून का अर्जुन हत्याकांड यह बताता है कि कैसे संपत्ति और पैसों का विवाद इंसानी रिश्तों से बड़ा हो जाता है। खून से सने अनानास के टुकड़े केवल एक हत्या का सबूत नहीं, बल्कि उस लालच और टकराव की निशानी हैं, जिसने एक बेटे की जान ले ली। पुलिस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है, ताकि इस जघन्य अपराध के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

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