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देहरादून: करोड़ों की धोखाधड़ी में भूमाफिया दीपक मित्तल पर केस, तीन साथियों सहित FIR दर्ज

राजपुर थाने में AMW डेवलपर्स कंपनी से 3.32 करोड़ की हेराफेरी का आरोप, रियल एस्टेट लेन-देन के बहाने निजी खातों में ट्रांसफर किया पैसा

देहरादून, 1 अगस्त 2025 – राजधानी देहरादून में चर्चित भूमाफिया दीपक मित्तल और उसके तीन सहयोगियों पर करोड़ों की धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगा है। राजपुर थाने में दर्ज एफआईआर में दावा किया गया है कि आरोपियों ने एक रियल एस्टेट कंपनी के नाम पर 3.32 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है।

इस हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराध में दीपक मित्तल के साथ मनीष गुप्ता, मनीष गर्ग और विनीता गर्ग को सह-आरोपी बनाया गया है।


शिकायतकर्ता कौन है?

यह मामला AMW डेवलपर्स कंपनी से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता आर्यन वालिया, जो कंपनी के सह-संस्थापक राजपाल वालिया के बेटे हैं, ने तहरीर में आरोप लगाया कि:

“2019 में दीपक मित्तल ने निदेशक मनीष गुप्ता के साथ मिलकर कंपनी के खाते से 3.32 करोड़ रुपये निकाले और इसे निजी लेन-देन में इस्तेमाल किया।”


धोखाधड़ी का तरीका क्या था?

  • रकम पहले AMW डेवलपर्स के खाते से निकाली गई।
  • इसके बाद मनीष गुप्ता, मनीष गर्ग और विनीता गर्ग ने इस धनराशि को अपने व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर किया।
  • फिर, इस रकम को “प्लैटो प्रोजेक्ट” के फ्लैट खरीदने के नाम पर दोबारा कंपनी के खाते में डाला गया, ताकि रिकॉर्ड में सब कुछ वैध दिखे।

पुलिस का कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिससे कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया और रकम का दुरुपयोग किया गया।


किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

एफआईआर में आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आर्थिक अपराध से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी जा सकती है, क्योंकि रकम बड़ी है और मामला जटिल है।


कंपनियों की भूमिका क्या है?

इस पूरे फर्जीवाड़े में पुष्पांजलि रीयलम्स और इंफ्राटेक प्रोजेक्ट्स का नाम भी सामने आया है। इन्हीं प्रोजेक्ट्स के फ्लैट खरीदने के नाम पर कथित रूप से पैसा कंपनी में लौटाया गया, जबकि असल में यह कागजी लेन-देन था।


दीपक मित्तल पहले से है जेल में बंद

बता दें कि दीपक मित्तल पहले से ही जमीन घोटाले के एक अन्य मामले में जेल में बंद है। उसके खिलाफ उत्तराखंड में कई फर्जीवाड़ों और अवैध कब्जों के केस चल रहे हैं। यह मामला उस पर चल रही वित्तीय जांचों में एक और गंभीर अध्याय जोड़ता है।


क्या बोले अधिकारी?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार:

“प्रथम दृष्टया मामला आर्थिक अपराध का है। दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आरोपियों के बैंक खातों और लेनदेन का पूरा ट्रेल खंगाला जा रहा है। यदि जरूरी हुआ तो आर्थिक अपराध शाखा को जांच सौंपी जाएगी।”


निष्कर्ष

देहरादून में भूमाफियाओं और बिल्डर लॉबी के गठजोड़ का यह ताजा मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही की कितनी जरूरत है। दीपक मित्तल और उसके साथियों पर लगे ये आरोप सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हो सकते—इसकी जांच कई और कड़ियों को उजागर कर सकती है।

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