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देहरादून का ऐतिहासिक झंडेजी मेला 8 मार्च से, 22 साल बाद अनिल गोयल परिवार चढ़ाएगा दर्शनी गिलाफ

देहरादून, 24 फरवरी 2026

आस्था, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक देहरादून का ऐतिहासिक झंडेजी मेला इस वर्ष 8 मार्च से शुरू होगा। श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में होली के पांचवें दिन, चैत्रवदी पंचमी पर झंडेजी के आरोहण के साथ मेले का शुभारंभ होगा। यह धार्मिक उत्सव 27 मार्च, रामनवमी तक चलेगा। 10 मार्च को भव्य नगर परिक्रमा निकाली जाएगी।


22 वर्षों बाद देहरादून के परिवार को मिला दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का अवसर

इस वर्ष दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य देहरादून के प्रसिद्ध व्यापारी अनिल कुमार गोयल के परिवार को प्राप्त हुआ है। उन्होंने लगभग 22 वर्ष पूर्व अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना के साथ दर्शनी गिलाफ की बुकिंग कराई थी।

पीपलमंडी स्थित 75 वर्ष पुरानी दुकान मै. पीताम्बर दास एंड संस के संचालक अनिल गोयल ने बताया कि जनवरी में उन्हें इसकी सूचना मिली। उन्होंने भावुक होकर कहा कि बचपन से दरबार साहिब में माथा टेकते आए हैं और गुरु महाराज की कृपा से परिवार को यह सौभाग्य मिला है।

परिवार में पत्नी कुसुम गोयल, पुत्र पंकज गोयल, अनुज गोयल और पुत्री पूजा गोयल सहित दो-दो पोते-पोतियां शामिल हैं। अनिल गोयल वैश्य समाज और आढ़त बाजार व्यापार मंडल के सदस्य भी हैं।


झंडेजी पर चढ़ते हैं तीन प्रकार के गिलाफ

झंडेजी पर कुल तीन प्रकार के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं—

  • सबसे भीतर 41 सादे गिलाफ
  • मध्य भाग में 21 सनील (मखमली) गिलाफ
  • सबसे ऊपर एक दर्शनी गिलाफ

दर्शनी और सनील गिलाफ चढ़ाने के लिए वर्षों पहले से बुकिंग करानी पड़ती है। इस बार भी गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया विशेष धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न होगी।


मेले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

सिखों के सातवें गुरु श्री गुरु हर राय जी के ज्येष्ठ पुत्र श्री गुरु राम राय महाराज का जन्म 1646 में पंजाब के कीरतपुर (होशियारपुर) में हुआ था। उन्होंने देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया और लोककल्याण के लिए दरबार साहिब में विशाल ध्वज स्थापित किया।

होली के पांचवें दिन उनके जन्मोत्सव के अवसर पर झंडेजी मेले का आयोजन किया जाता है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में संगत यहां पहुंचती है और ध्वज से आशीर्वाद ग्रहण करती है।


तैयारियां जोरों पर, 25 फरवरी से शुरू होंगे धार्मिक कार्यक्रम

मेला अधिकारी विजय गुलाटी के अनुसार, संगत के ठहरने, दरबार साहिब की सजावट, रंग-रोगन और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत 25 फरवरी से हो जाएगी।


झंडा मेला 2026: कार्यक्रम की रूपरेखा

25 फरवरी: पंजाब की पैदल संगत के लिए हुक्मनामा बड़गांव ले जाया जाएगा।
27 फरवरी: सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास महाराज अराईयांवाला में पैदल संगत के स्वागत के लिए प्रस्थान करेंगे।
28 फरवरी: पैदल संगत सहसपुर पहुंचेगी।
1 मार्च: पैदल संगत कांवली होते हुए दरबार साहिब पहुंचेगी।
5 मार्च: गिलाफ सिलाई का कार्य आरंभ, नया ध्वजदंड बाम्बे बाग से दरबार साहिब लाया जाएगा।
7 मार्च: पूर्वी संगत की विदाई।
8 मार्च: सुबह झंडेजी उतारने और गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया, शाम 4–5 बजे झंडेजी का आरोहण।
9 मार्च: संगत द्वारा झंडेजी पर माथा टेकना।
10 मार्च: सुबह 7:30 बजे से नगर परिक्रमा।
27 मार्च: रामनवमी पर मेले का समापन।


निष्कर्ष

देहरादून का झंडेजी मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान भी है। लगभग तीन सप्ताह तक चलने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन और मेला प्रबंधन समिति ने शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। इस वर्ष 22 साल बाद स्थानीय परिवार को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का अवसर मिलना शहर के लिए विशेष गौरव का विषय माना जा रहा है।

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