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देहरादून: मलिन बस्ती और वन भूमि के मुद्दे पर INDIA गठबंधन का हमला, 25 फरवरी को गांधी पार्क में धरने का ऐलान

देहरादून, 22 फरवरी 2026


राजधानी स्थित कांग्रेस भवन में रविवार को INDIA गठबंधन की ओर से संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी प्रेसवार्ता में पहुंचे और राज्य सरकार पर मलिन बस्तियों व वन भूमि पर बसे लोगों के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। गठबंधन ने 25 फरवरी को गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है।


“मालिकाना हक देने के बजाय उजाड़ रही सरकार”

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पिछले कई वर्षों से वन भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक देने के बजाय उन्हें उजाड़ने की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि हजारों परिवार वर्षों से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं, लेकिन सरकार उनके पुनर्वास और अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है।

रावत ने कहा कि सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए वन भूमि और मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को वैध अधिकार देने चाहिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।


इन क्षेत्रों को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग

INDIA गठबंधन ने मांग उठाई कि बिंदुखत्ता, गांधीग्राम, बागजाला और टोंगिया गांव को तत्काल राजस्व ग्राम घोषित किया जाए। नेताओं का कहना है कि इन क्षेत्रों में वर्षों से लोग निवास कर रहे हैं, लेकिन राजस्व ग्राम का दर्जा न मिलने के कारण उन्हें मूलभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।


25 फरवरी को गांधी पार्क में धरना

प्रेसवार्ता में गठबंधन की ओर से ऐलान किया गया कि मलिन बस्ती और वन भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक दिलाने की मांग को लेकर 25 फरवरी को देहरादून के गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस धरने में विभिन्न दलों के नेता और प्रभावित परिवार बड़ी संख्या में शामिल होंगे।


राजनीतिक तापमान बढ़ा

वन भूमि और मलिन बस्ती का मुद्दा लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति में संवेदनशील विषय रहा है। INDIA गठबंधन के इस ऐलान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।


निष्कर्ष

मलिन बस्तियों और वन भूमि पर बसे परिवारों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। 25 फरवरी का प्रस्तावित धरना इस विषय को और धार दे सकता है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर टकराव बढ़ने के संकेत हैं।

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