तारीख: 27 अक्टूबर 2025
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जिला पूर्ति विभाग ने अपात्र राशन कार्ड धारकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों को अब स्वेच्छा से अपने राशन कार्ड जमा करने की चेतावनी दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो लोग निर्धारित पात्रता मानकों से अधिक आय के बावजूद सरकारी राशन का लाभ ले रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब तक 3600 राशन कार्ड निरस्त
जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) के.के. अग्रवाल ने बताया कि अब तक 3600 राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। जांच में यह कार्ड ऐसे लोगों के पाए गए जो सरकारी योजनाओं की पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते थे।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (SFSA) के अंतर्गत चल रही योजनाओं की पात्रता के लिए आय सीमा निर्धारित की गई है।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA): वार्षिक आय सीमा ₹1.8 लाख।
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राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (SFSA): वार्षिक आय सीमा ₹5 लाख।
इन दोनों योजनाओं के तहत ऐसे परिवारों को राशन का लाभ दिया जाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
जांच शुरू, ब्लॉक व शहर स्तर पर प्रक्रिया तय
पूर्ति विभाग ने पूरे जिले में राशन कार्डों की सघन जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
डीएसओ अग्रवाल ने बताया कि जो लोग स्वयं को पात्रता मानकों से बाहर पाते हैं, वे स्वेच्छा से अपने कार्ड वापस कर दें।
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ग्राम पंचायत क्षेत्रों में अपात्र उपभोक्ताओं को अपने ग्राम विकास अधिकारी (VDO) को राशन कार्ड सुपुर्द करना होगा।
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शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को अपने कार्ड डीएसओ कार्यालय, देहरादून में जमा कराने होंगे।
यदि निर्धारित समय में ऐसा नहीं किया गया, तो संबंधित उपभोक्ताओं के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
क्यों जरूरी है यह कार्रवाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई ऐसे उपभोक्ता हैं जो निजी नौकरियों, सरकारी पदों या ऊंची आय के बावजूद राशन कार्ड से सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं। इससे गरीब वर्गों तक खाद्यान्न की आपूर्ति बाधित हो रही है।
विभाग का कहना है कि यह अभियान सिस्टम को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए चलाया जा रहा है, ताकि केवल योग्य लाभार्थियों को ही सरकारी योजनाओं का फायदा मिल सके।
सरकार की अपील: स्वयं सुधार दिखाएं नागरिक
जिला पूर्ति विभाग ने अपात्र कार्ड धारकों से “स्वयं सुधार की पहल” करने की अपील की है।
डीएसओ ने कहा, “यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से कार्ड लौटाता है, तो उसे दंडात्मक कार्रवाई से छूट दी जा सकती है। लेकिन जानबूझकर गलत जानकारी देने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।”
निष्कर्ष
देहरादून में पूर्ति विभाग की यह सख्त कार्रवाई सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अपात्र लाभार्थियों को चेतावनी दी गई है कि वे स्वेच्छा से अपने कार्ड लौटाएं, अन्यथा विभाग कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।


