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देहरादून में दौड़ेंगी ‘हवा में बसें’: देश का पहला एलिवेटेड ई-बीआरटीएस प्रोजेक्ट तैयार, मेट्रो जैसा मिलेगा सफर

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 28 मार्च 2026

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून जल्द ही देश के शहरी परिवहन में एक नई क्रांति का गवाह बन सकती है। प्रदेश सरकार यहां भारत का पहला एलिवेटेड ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) शुरू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस परियोजना के तहत बसें जमीन पर नहीं, बल्कि सड़क के ऊपर पिलरों पर बने ट्रैक पर मेट्रो की तर्ज पर दौड़ेंगी।


सरकार का मानना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल देहरादून के ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करेगा, बल्कि कम लागत में मेट्रो जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा। यदि योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो यह देश में अपनी तरह का पहला मॉडल होगा।


क्या है एलिवेटेड ई-बीआरटीएस मॉडल?
इस प्रणाली के तहत शहर की सड़कों के ऊपर एक एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार किया जाएगा, जिस पर विशेष लेन में हाई-कैपेसिटी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन होगा। ये बसें सामान्य ट्रैफिक से पूरी तरह अलग रहेंगी, जिससे बिना किसी बाधा के तेज और सुरक्षित सफर संभव हो सकेगा।


देहरादून से हरिद्वार-ऋषिकेश तक कनेक्टिविटी की योजना
सरकार इस प्रोजेक्ट को केवल देहरादून तक सीमित नहीं रखना चाहती। भविष्य में इसे हरिद्वार और ऋषिकेश से जोड़ने की योजना है, जिससे क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।


चीन के शियामेन मॉडल से प्रेरणा
वैश्विक स्तर पर चीन का शियामेन शहर इस तरह के एलिवेटेड बीआरटीएस सिस्टम का सफल उदाहरण है, जहां वर्ष 2008 में यह मॉडल शुरू हुआ था। कम लागत और तेज निर्माण के कारण यह प्रणाली बेहद सफल रही और अब देहरादून में भी इसी तर्ज पर इसे लागू करने की तैयारी है।


देहरादून के लिए क्यों उपयुक्त है यह मॉडल?
देहरादून की भौगोलिक स्थिति, सीमित सड़क चौड़ाई और तेजी से बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए एलिवेटेड ई-बीआरटीएस एक प्रभावी समाधान माना जा रहा है। शहर में सड़क चौड़ीकरण की सीमित संभावनाएं हैं, ऐसे में ऊपर से गुजरने वाला यह सिस्टम ट्रैफिक बोझ को कम करने में कारगर साबित हो सकता है।


कैसी होंगी ई-बीआरटीएस बसें?
इस परियोजना में चलने वाली बसें आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस होंगी। इनमें करीब 150 यात्रियों की क्षमता वाली लंबी दो-खंडीय बसें होंगी, जो मेट्रो जैसी भीड़ को संभाल सकेंगी।
बसों में 3-4 बड़े दरवाजे होंगे, जिससे यात्रियों का चढ़ना-उतरना आसान और तेज होगा।
इसके अलावा, एसी, डिजिटल डिस्प्ले, ऑफ-बोर्ड टिकटिंग और दिव्यांग व बुजुर्गों के अनुकूल डिजाइन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये बसें पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।


सरकार की प्राथमिकता में शामिल प्रोजेक्ट
आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार के अनुसार, राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर गंभीर है और इसे जमीन पर उतारने के लिए उच्च स्तर पर कार्य जारी है। योजना को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।


निष्कर्ष:
एलिवेटेड ई-बीआरटीएस देहरादून के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो शहर को आधुनिक, तेज और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली प्रदान करेगा। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो यह न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक नया मॉडल बन सकती है, जो शहरी परिवहन के भविष्य को नई दिशा देगा।

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