22,100 पैकेट जब्त, दिल्ली-मुजफ्फरनगर से जुड़े तार, करोड़ों की टैक्स चोरी का खुलासा
देहरादून | 12 जुलाई 2025
उउत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नकली ब्रांडेड सिगरेट की बड़े पैमाने पर तस्करी का खुलासा हुआ है। राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने छापा मारकर 22,100 नकली सिगरेट पैकेट जब्त किए हैं। इस रैकेट का संचालन दिल्ली और मुजफ्फरनगर से हो रहा था और इसका उद्देश्य था सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लगाना।
जांच की शुरुआत कैसे हुई?
इस संगठित गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब लांसर नेटवर्क कंपनी के मैनेजर अनुकल्प सिंह ने शिकायत दर्ज करवाई कि देहरादून में गोल्ड फ्लैक और अन्य प्रीमियम ब्रांड की नकली सिगरेट खुलेआम बेची जा रही है।
शिकायत के बाद पुलिस उपाधीक्षक अंकुश मिश्रा के नेतृत्व में STF, स्थानीय पुलिस और कंपनी प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम बनाई गई।
छापा: नकली सिगरेट का गोदाम मिला जाखन में
- टीम ने जाखन स्थित ‘निशांत ट्रेडर्स’ के गोदाम पर छापा मारा।
- वहां से गोल्ड फ्लैक ब्रांड का लेबल लगी नकली सिगरेट की भारी खेप बरामद की गई।
- पैकेट्स पर नकली बारकोड, डुप्लीकेट लोगो, और स्वास्थ्य चेतावनी की हूबहू कॉपी मौजूद थी।
- कंपनी प्रतिनिधियों ने मौके पर पुष्टि की कि सारे उत्पाद जाली हैं।
कैसे चल रहा था यह गोरखधंधा?
- सिगरेट के नकली पैकेट सस्ते दामों पर थोक में खरीदे जाते थे।
- इन्हें असली ब्रांड बताकर फुटकर दुकानदारों को ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।
- सभी ट्रांजैक्शन नकद में होते थे, जिससे पूरी तरह टैक्स चोरी की जा सके।
- नकली माल उत्तराखंड के कई जिलों में सप्लाई किया जाता था।
बड़ी साजिश की ओर इशारा: STF की कार्रवाई जारी
एसटीएफ प्रमुख एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया:
“यह एक संगठित आपराधिक गिरोह है, जिसकी जड़ें उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जुड़ी हैं। इनके तार संभवतः अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं।”
वर्तमान में STF की टीमें दिल्ली और मुजफ्फरनगर में भी सक्रिय हैं और कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
मुख्य बिंदु संक्षेप में:
- 22,100 नकली सिगरेट पैकेट बरामद
- दिल्ली-मुजफ्फरनगर से लिंक
- करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान
- गोल्ड फ्लैक और अन्य ब्रांड्स की हूबहू नकल
- आपराधिक गिरोह की गिरफ्तारी और पूछताछ जारी
बड़ा सवाल — क्या आप जानते हैं आपकी खरीदी हुई सिगरेट असली है या नकली?
देश में नकली तंबाकू उत्पादों का बाजार तेजी से फैल रहा है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचाता है। ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं की जागरूकता और प्रशासन की सख्ती बेहद जरूरी है।


