देहरादून | 18 फरवरी 2026
राजधानी देहरादून में अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लगाए गए छह माह के प्रतिबंध के बाद बैंकिंग व्यवस्था में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई के चलते बैंक के करीब नौ हजार खाताधारकों के लगभग 90 करोड़ रुपये फंस गए हैं, जिससे लोगों में गहरी नाराजगी और चिंता देखने को मिल रही है।
आरबीआई ने जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा का हवाला देते हुए सोमवार को बैंक पर कड़े प्रतिबंध लगाए। यह बैंक आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त और पंजीकृत है तथा इसकी स्थापना 30 जुलाई 1973 को हुई थी। लंबे समय से संचालित इस बैंक पर अचानक लगे प्रतिबंध की खबर फैलते ही खाताधारकों में अफरा-तफरी मच गई।
मंगलवार दोपहर बड़ी संख्या में खाताधारक बैंक परिसर पहुंचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। नारेबाजी और बढ़ते आक्रोश को देखते हुए बैंककर्मी अपनी कुर्सियां छोड़कर निचले तल पर एक कमरे में बंद हो गए। हालात बिगड़ते देख सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
खाताधारकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी जमा राशि को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस संबंध में उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत भी सौंपी है और बैंक प्रबंधन से स्पष्ट जवाब की मांग की है।
पैसे न मिलने से बढ़ी मुश्किलें
खाताधारकों का कहना है कि बैंक से रकम न निकल पाने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। व्यापार प्रभावित हो रहा है और जिन लोगों को भुगतान करना है, वे लगातार दबाव बना रहे हैं। 32 वर्षों से खाताधारक नरेंद्र बत्रा ने बताया कि वे कई बार बैंक से जानकारी लेने पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने हर बार टालमटोल किया।
खाताधारक मुकेश शर्मा ने कहा कि उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बैंक की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि पैसा कैसे और कब तक वापस मिलेगा। खाताधारकों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आपात स्थिति में वे अपनी ही मेहनत की कमाई तक कैसे पहुंचेंगे।
यस बैंक की याद ताजा
इस घटना ने साल 2020 की उस स्थिति की याद दिला दी है, जब आरबीआई ने यस बैंक के निदेशक मंडल पर पाबंदी लगाई थी। उस समय भी ग्राहकों में भारी घबराहट फैल गई थी और लोग सुबह-सुबह बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए थे।
निष्कर्ष:
अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर आरबीआई की कार्रवाई ने एक बार फिर सहकारी बैंकों की वित्तीय मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों खाताधारकों की गाढ़ी कमाई फंसी हुई है और वे अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। अब सबकी निगाहें आरबीआई और बैंक प्रबंधन पर टिकी हैं कि जमाकर्ताओं को राहत कब और कैसे मिलेगी।


