देहरादून, दिनांक: 2 फरवरी 2026
देहरादून एक बार फिर लोकसंस्कृति, परंपरा और हिमालयी जीवनशैली के उत्सव का साक्षी बनने जा रहा है। शहीद मेजर दुर्गामल्ल मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से 20 से 22 फरवरी तक गढ़ी कैंट स्थित महेंद्र ग्राउंड में तीन दिवसीय गोरखा हिमालयन फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू, पारंपरिक वेशभूषा की रंगत और फैशन शो की चमक दर्शकों को खास अनुभव कराएगी।
फेस्टिवल के दौरान विभिन्न स्टॉलों पर उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों के पारंपरिक खानपान का स्वाद मिलेगा। साथ ही, लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए पहाड़ की आत्मा को मंच पर जीवंत किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य गोरखा और हिमालयी संस्कृति, शिल्प और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना है।
लोक कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियां
इस सांस्कृतिक उत्सव में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए नामचीन लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। उत्तराखंड की प्रसिद्ध जागर गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट, सिलीगुड़ी के लोकगायक विक्रम कालीकोटी, दार्जिलिंग की लोकगायिका सुरक्षा सिंचुरी, डीआईडी फेम आद्याश्री उपाध्याय और जम्मू से एम जैक्शन कल्चर इंस्टीट्यूट की टीम दर्शकों का मनोरंजन करेगी।
तैयारियों को दिया गया अंतिम रूप
सोमवार को गढ़ी कैंट स्थित गोरखाली सुधार सभा में आयोजित बैठक में फेस्टिवल की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। ट्रस्ट की अध्यक्षा कमला थापा ने बताया कि तीनों दिन कार्यक्रम में पहाड़ी खानपान, पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक फैशन शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला देखने को मिलेगी। आयोजन का शुभारंभ साइकोलोथान से किया जाएगा।
संस्कृति के साथ सामाजिक संदेश
आयोजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया जाएगा। पूरे फेस्टिवल को पालीथिन मुक्त रखने का संकल्प लिया गया है। इसके साथ ही मधुमक्खी पालन, फल संरक्षण, सौंदर्य कला, नेचर फोटोग्राफी और ट्रैफिक नियमों जैसे विषयों पर उपयोगी कार्यशालाएं भी आयोजित होंगी, जो दर्शकों के लिए ज्ञानवर्धक साबित होंगी।
सुबह से रात तक चलेगा उत्सव
आयोजन की सचिव प्रभा शाह ने बताया कि गोरखा हिमालयन फेस्टिवल तीनों दिन सुबह 11 बजे से रात 10:30 बजे तक चलेगा। सांस्कृतिक संध्या में हिमालयी राज्यों की लोकगायन, लोकनृत्य और लोकवाद्य की प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।
बैठक में कोषाध्यक्ष मीनू क्षेत्री, कविता क्षेत्री, मेनका राना, देविन शाही, सूर्य विक्रम शाही, सतीश थापा, दीप्ति राना, वंदना बिष्ट, मीनू आले सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
गोरखा हिमालयन फेस्टिवल केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमालयी विरासत, परंपरा और आधुनिकता के संगम का जीवंत मंच है। देहरादून के लिए यह उत्सव न सिर्फ सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि लोककला और पारंपरिक हुनर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा।


