देहरादून/मुंबई/दिल्ली।
उत्तराखंड STF और मुंबई क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करों के गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने दिल्ली के यमुना विहार निवासी कामरान अहमद को देहरादून के क्लेमेनटाउन थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। शुरुआती पूछताछ में कामरान ने ‘रॉयल आर्म्स’ गन हाउस के जरिए अवैध हथियारों की तस्करी, नक्सलियों तक हथियार सप्लाई, और 2200 कारतूस तस्करी जैसे गंभीर खुलासे किए हैं।
कैसे हुआ पर्दाफाश?
STF उत्तराखंड और मुंबई क्राइम ब्रांच लंबे समय से इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। महाराष्ट्र में नक्सल प्रभावित क्षेत्र से हथियार बरामद होने के बाद सुराग दिल्ली तक जा पहुंचा। इसी कड़ी में देहरादून से कामरान अहमद को गिरफ्तार किया गया, जिसने पूछताछ में चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए।
गन हाउस से अवैध हथियारों का नेटवर्क
कामरान का संबंध देहरादून के परीक्षित नेगी से था, जो पहले पटेल रोड पर ‘रॉयल आर्म्स’ नाम से गन हाउस चलाता था।
- यह गन हाउस लाइसेंसधारी ग्राहकों से पुराने या खराब हथियार जमा करता था।
- नियम के अनुसार इन हथियारों को नष्ट किया जाना चाहिए, लेकिन परीक्षित और कामरान ने इन्हें ठीक कर तस्करी के लिए बेचने का नेटवर्क खड़ा कर दिया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचे हथियार
पुलिस की जांच में सामने आया कि ये हथियार सिर्फ शिकार या निजी सुरक्षा तक सीमित नहीं रहे।
- कई हथियारों की सप्लाई महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित जिलों तक की गई है।
- ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि क्या यह नेटवर्क नक्सली संगठनों से सीधे तौर पर जुड़ा था।
कारतूस तस्करी का बड़ा मामला
13 अगस्त 2022 को दिल्ली में परीक्षित नेगी की गिरफ्तारी के समय 2200 कारतूस की तस्करी का मामला सामने आया था।
- अंतिम बार अमृतसर के एक दुकानदार को कारतूस भेजे गए थे।
- वह शुरुआत में वैध लाइसेंस पर कारतूस की बिक्री करता था, लेकिन बाद में कई राज्यों में संदिग्ध डिलीवरी करने लगा।
STF का बयान
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया:
“कामरान अहमद की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े सुराग हाथ लगे हैं। जिन हथियारों को खत्म किया जाना था, उन्हें तकनीकी मरम्मत के बाद नक्सली क्षेत्रों में बेचा गया। यह मामला संगठित अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा है।”
आगे की कार्रवाई
- महाराष्ट्र पुलिस, उत्तराखंड STF और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
- फॉरेंसिक जांच और डिजिटल ट्रेसिंग के ज़रिए यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध हथियारों की कितनी खेप किस-किस को बेची गई।
- इस तस्करी से जुड़े काले धन के नेटवर्क की भी जांच शुरू हो चुकी है।
विश्लेषण:
देहरादून में पकड़ा गया यह मामला सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है। यह केस उत्तर भारत से लेकर नक्सल प्रभावित मध्य भारत और संभावित रूप से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक फैला हो सकता है। पुलिस की अगली कार्रवाई कई और चौंकाने वाले खुलासे ला सकती है।


