BREAKING

देहरादून वकीलों का हटके विरोध: रैन बसेरा प्रस्ताव के खिलाफ सड़क पर उतरे अधिवक्ता, चेंबर निर्माण की मांग तेज

तारीख: 12 नवंबर 2025
स्थान: देहरादून


दूसरे दिन भी वकील सड़क पर, विरोध का बदला अंदाज

देहरादून में वकील मंगलवार को लगातार दूसरे दिन सड़कों पर उतरे, लेकिन इस बार उनका विरोध साधारण प्रदर्शन जैसा नहीं था। अधिवक्ताओं ने अपने आंदोलन को एक अनोखे मोड़ देते हुए रोजाना सांकेतिक चक्का जाम का एलान किया है।
उनकी मांग है कि पुरानी जिला अदालत परिसर की खाली भूमि पर रैन बसेरा न बनाकर अधिवक्ताओं के चेंबर निर्मित किए जाएं।


पुरानी जिला अदालत परिसर पर रैन बसेरा प्रस्ताव बना विवाद की जड़

स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुराने जिला जज परिसर स्थित सिविल कोर्ट परिसर में रैन बसेरा बनाने का प्रस्ताव सामने आया था।
इस प्रस्ताव ने देहरादून बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं में नाराजगी पैदा कर दी।
सोमवार से वकील इस प्रस्ताव के खुले विरोध में उतर आए हैं और इसे तुरंत निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।


हर दिन अलग तरीके से चक्का जाम, बढ़ती जाएगी अवधि

वकीलों ने विरोध के लिए अलग रास्ता अपनाया है।
सोमवार को हरिद्वार रोड पर सुबह 10:30 से 11:30 बजे तक चक्का जाम किया गया।
इसके चलते एक घंटे तक सड़क पर यातायात ठप रहा।

मंगलवार को प्रदर्शन की अवधि और बढ़ा दी गई।
इस बार वकीलों ने 10:30 से 12:30 बजे, पूरे दो घंटे तक सड़क को जाम रखा।

बार एसोसिएशन ने स्पष्ट कहा है कि
जब तक उन्हें लिखित व ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे चक्का जाम की अवधि लगातार बढ़ाते रहेंगे।


प्रशासन अलर्ट, मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे

सोमवार को चक्का जाम की सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह मौके पर पहुंचे।
बार एसोसिएशन ने उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा और रैन बसेरा प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने के लिए कहा।

इस दौरान हरिद्वार रोड पर नई और पुरानी अदालत के बीच
वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रही।
पुलिस ने दोनों ओर से वाहनों को डायवर्ट किया, जिससे व्यस्त समय में लोगों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ी।


वकीलों का तर्क: चेंबर निर्माण अत्यावश्यक, रैन बसेरा कहीं और बने

अधिवक्ताओं का कहना है कि पुरानी अदालत परिसर में चेंबर बनाने के अलावा उनकी कोई और उचित जगह नहीं है।
इस भूमि का उपयोग किसी अन्य निर्माण के लिए करना
उनके पेशेवर ढांचे को कमजोर करेगा और कार्य व्यवस्था बाधित करेगा।

वकील यह भी कहते हैं कि रैन बसेरा की जरूरत कहीं और पूरी की जा सकती है,
पर यह भूमि दशकों से अधिवक्ता चैंबर के लिए निर्धारित समझी जाती रही है।


निष्कर्ष: समाधान न मिला तो आंदोलन और उग्र होगा

अधिवक्ता समुदाय का इरादा साफ है:
अगर उन्हें संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया गया तो
रोज़ाना चक्का जाम लंबे समय तक चलेगा और विरोध चरणबद्ध तरीके से बढ़ता जाएगा।

देहरादून की मुख्य सड़कें पहले ही प्रभावित हो रही हैं,
और यदि विवाद जल्द नहीं सुलझा तो प्रशासन व आमजन दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ना तय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *